समस्या . अस्पतालों में नहीं है बॉयोकचरा निष्पादन की व्यवस्था
छपरा(सारण) : अस्पतालों का कचरा सड़कों पर फेंका जा रहा है और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों की अवहेलना की जा रही है. यह स्थिति ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्र में चल रहे अस्पतालों की है. सदर अस्पताल तथा कुछ निजी नर्सिंग होम को छोड़ कर शेष सभी नर्सिंग होम एवं प्राइवेट चिकित्सालयों का कचरा सड़कों पर फेंकने के कारण संक्रमण फैलने की आशंका है और इसके प्रति स्वास्थ्य विभाग तथा प्रशासन उदासीन बना हुआ है. कचरा सड़कों पर फेंकने के मामले में नगर निगम प्रशासन को कार्रवाई करने का अधिकार है लेकिन निगम प्रशासन की लापरवाही के कारण निजी नर्सिंग होम संचालकों की मनमानी बढती जा रही है.
आलम यह है कि शहर के चौक-चौराहों पर कचरे की ढेर पर नवजात शिशुओं का शव भी फेंक दिया जाता है. एक सप्ताह पहले ही रामलीला मठिया के पास सड़क पर नवजात शिशु का शव बरामद किया गया था. दो माह पहले साहेबगंज चौक के पास सड़क पर कूड़े की ढेर से एक नवजात का शव मिला था. छह माह पहले भगवान बाजार थाना क्षेत्र के गुदरी राय के चौक के पास से कूड़े की ढेर दो नवजात बच्चों का बरामद किया गया था.
क्या कहते हैं उपाधीक्षक
सदर अस्पताल से जो बायो मेडिकल कचरा निकलता है, मेडिकेयर कंपनी के द्वारा संग्रह कर निष्पादित किया जाता है. ठोस अपशिष्ट का निष्पादन नगर निगम के द्वारा किया जाता है. सदर अस्पताल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है.
डॉ शंभूनाथ सिंह , उपाधीक्षक , सदर अस्पताल, छपरा
क्या है बायोमेडिकल कचरा
अस्पताल में निकलने वाले बायोमेडिकल कचरों में चार तरह का कचरा होता है जिसमें ठोस अपशिष्ट को छोड़ कर शेष तीन तरह के कचरों का निष्पादन इंसीलेटर मशीन में किया जाता है. ठोस अपशिष्ट का निष्पादन नगर निगम के द्वारा किया जाता है और शेष तीन तरह के कचरा को इंसीलेटर मशीन में जलाकर नष्ट किया जाता है जिसमें एनामेडिकल वेस्ट (शरीर के कटे हुए अंगों), नुकीला कचरा तथा प्लास्टिक कचरा को उच्च तापमान पर इंसीलेटर मशीन में जलाया जाता है. सारण जिले में किसी भी अस्पताल में इंसीलेटर मशीन नहीं है लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस जिले के बायो मेडिकल कचरा का निष्पादन करने के लिए मेडिकेयर नामक कंपनी को अधिकृत किया है जिसका इंसीलेटर मशीन का प्लांट मुजफ्फरपुर में है. कंपनी अपने वाहन से बायो मेडिकल कचरे का संग्रह कराती है और निष्पादन कराती है. सदर अस्पताल तथा कुछ निजी नर्सिंग होम के कचरे का निष्पादन मेडिकेयर कंपनी करती है लेकिन अधिकांश अस्पतालों के कचरा को सड़क पर फेंक दिया जाता है. दरअसल इसके लिए कंपनी को राशि का भुगतान करना पड़ता है और निजी नर्सिंग होम संचालक राशि खर्च नहीं करते हैं. अस्पताल का जो ठोस अपशिष्ट होता है, उसे नगर निगम के द्वारा संग्रह करने का प्रावधान है और नगर निगम की लचर सफाई-व्यवस्था के कारण उसी में बायो मेडिकल कचरा भी फेंक दिया जाता है.
