समस्तीपुर: खरीफ सीजन के बीच मौसम का मिजाज बदलने के साथ ही कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए समसामयिक कृषि परामर्श जारी किया है. अगस्त का महीना धान, मिश्रीकंद, खरीफ प्याज, आम, केला और मशरूम की खेती के लिए बेहद अहम माना जाता है. ऐसे में वैज्ञानिकों ने किसानों को समय पर खरपतवार नियंत्रण, रोपाई और पोषण प्रबंधन करने की सलाह दी है, ताकि फसल का बेहतर उत्पादन मिल सके.
धान में खरपतवार नियंत्रण पर दें विशेष ध्यान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए मौसम साफ रहने पर ही रसायनों का छिड़काव करें. प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में किसी एक खरपतवारनाशी का उपयोग किया जा सकता है. इसके लिए ब्यूटाक्लोर 3.0 लीटर, प्रीटिलाक्लोर 1.5 लीटर या पेंडीमेथालिन 3.0 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है.
अगस्त में पूरी करें मिश्रीकंद की बुआई
वैज्ञानिकों ने कहा है कि अच्छी जल निकासी वाली ऊंची भूमि में राजेन्द्र मिश्रीकंद एवं राजेन्द्र मिश्रीकंद-2 की बुआई अगस्त माह में हर हाल में पूरी कर लें. प्रति हेक्टेयर 30 से 40 किलोग्राम बीज का उपयोग करें. कतार से कतार 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेंटीमीटर रखें. खेत में 200 क्विंटल गोबर की खाद, 80 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 80 किलोग्राम पोटाश देने की सलाह दी गई है.
खरीफ प्याज की रोपाई का सही समय
विशेषज्ञों ने किसानों को इसी माह खरीफ प्याज की रोपाई पूरी करने की सलाह दी है. खेत तैयार करते समय 150 से 200 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने को कहा गया है. पौधशाला में खरपतवार नहीं जमने दें और तेज धूप से बचाव के लिए 6 से 7 फीट ऊंचाई पर शेड नेट लगाने की सलाह दी गई है.
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आम और केले के पौधे लगाने का अनुकूल समय
बागवानी करने वाले किसानों के लिए भी यह समय काफी महत्वपूर्ण बताया गया है. आम के कलमी पौधों के लिए 10×10 मीटर, बीजू पौधों के लिए 12×12 मीटर तथा सघन बागवानी के लिए 5×5 मीटर की दूरी रखने की सलाह दी गई है. आम्रपाली किस्म के लिए 2.5×2.5 मीटर दूरी उपयुक्त मानी गई है. वहीं केले की लंबी किस्मों को 2×2 मीटर और बौनी किस्मों को 1.5×1.5 मीटर दूरी पर लगाने का सुझाव दिया गया है.
मशरूम उत्पादन के लिए अभी करें तैयारी
मौजूदा मौसम को देखते हुए दूधिया और ऑयस्टर मशरूम की खेती के लिए शेड की मरम्मत और सफाई जल्द पूरी करने की सलाह दी गई है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि बेहतर उत्पादन के लिए केवल प्रमाणित सरकारी संस्थानों या विश्वसनीय प्रयोगशालाओं से ही मशरूम का स्पॉन (बीज) खरीदें.
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