हसनपुर में मृत बागमती नदी का अस्तित्व खतरे में, धड़ल्ले से हो रहा अतिक्रमण, प्रशासन पर उठे सवाल

हसनपुर बाजार से गुजरने वाली ऐतिहासिक मृत बागमती नदी पर लगातार अतिक्रमण होने से उसका अस्तित्व संकट में पड़ गया है. नदी की जमीन पर मकान और दुकानों के निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पैमाइश और कार्रवाई की मांग की है. पढ़ें पूरी खबर..

समस्तीपुर से गिरिजा नन्दन शर्मा की रिपोर्ट

Samastipur News: हसनपुर बाजार के बीचों-बीच से गुजरने वाली ऐतिहासिक मृत बागमती नदी इन दिनों अपने अस्तित्व को बचाने की जंग लड़ रही है. भू-माफियाओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों द्वारा नदी की जमीन पर लगातार अतिक्रमण किए जाने से इसकी चौड़ाई तेजी से सिमटती जा रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदी के बहाव क्षेत्र में मिट्टी भरकर पक्के मकान और दुकानों का निर्माण किया जा रहा है, जबकि प्रशासन इस पूरे मामले में मौन बना हुआ है.

दो किलोमीटर क्षेत्र में फैला अतिक्रमण

स्थानीय लोगों के अनुसार हसनपुर अस्पताल के समीप से लेकर रतिया टोला तक करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में नदी की जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है. अस्पताल से रतिया टोला के बीच कई मकान बन चुके हैं और नए निर्माण कार्य भी जारी हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह भूमि वास्तव में रैयती है तो प्रशासन को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए. लेकिन अब तक कोई आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है, जिससे लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

सड़क और नदी की भूमि पर सज गई दुकानें

अतिक्रमण केवल नदी तक सीमित नहीं है. प्रखंड मुख्यालय पथ में पेट्रोल पंप के समीप से लेकर मृत बागमती नदी के पुल तक सड़क और नदी की भूमि पर भी अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आ रही हैं. सड़क किनारे दर्जनों दुकानें संचालित हो रही हैं, जबकि उनके पीछे नदी की भूमि पर पक्के मकानों का निर्माण किया गया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान में भी कई स्थानों पर निर्माण कार्य जारी है.

अतिक्रमण से बढ़ी जाम की समस्या

हसनपुर बाजार के प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है. चीनी मिल चौक, रामपुर ढाला, वीरपुर पथ, भारद्वाज कॉलेज पथ और बड़गांव पथ पर प्रतिदिन लंबा जाम लग रहा है. शाम के समय सड़क किनारे अस्थायी दुकानों और ठेलों की संख्या बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो जाती है. कई स्थानों पर दो वाहनों का एक साथ गुजरना भी मुश्किल हो जाता है.

नदी की पैमाइश और अतिक्रमण हटाने की मांग

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मृत बागमती नदी की भूमि की पैमाइश कराने तथा अतिक्रमण हटाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो नदी का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो सकता है.

लोगों ने जिला प्रशासन से नदी को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने और अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.

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By Sarfaraz Ahmad

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