कृषि वैज्ञानिकों की सलाह, अभी करें धान की रोपाई और आम-केले का बाग लगाएं

मौसम विभाग की भविष्यवाणी को देखते हुए, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है. इस लेख में जानें कि कैसे धान की रोपाई करें और आम व केले के नए बाग लगाकर अपनी आय बढ़ाएं.

Samastipur News: मानसून के सक्रिय होने के साथ खेतों में रौनक लौट आई है. मौसम विभाग की ओर से आगामी दिनों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है. इसे देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए धान की रोपाई के साथ-साथ आम और केले के नए बाग लगाने की सलाह दी है.

जुलाई-अगस्त फलदार पौधों के रोपण का उपयुक्त समय

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई और अगस्त का महीना फलदार पौधों के रोपण के लिए सबसे उपयुक्त होता है. आम का बाग लगाते समय पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखना जरूरी है, ताकि भविष्य में पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिल सके.

कलमी आम के पौधों के लिए 10×10 मीटर, जबकि बीजू पौधों के लिए 12×12 मीटर की दूरी रखने की सलाह दी गई है. कम जगह में अधिक पौधे लगाने वाले किसान 5×5 मीटर की दूरी अपना सकते हैं. वहीं सघन बागवानी के तहत आम्रपाली किस्म के पौधों की रोपाई 2.5×2.5 मीटर की दूरी पर करने की सलाह दी गई है.

पुराने आम के पेड़ों में करें संतुलित पोषण प्रबंधन

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि फल दे रहे पुराने आम के पेड़ों से बेहतर उत्पादन के लिए प्रत्येक वर्ष प्रति वृक्ष 1 किलोग्राम नाइट्रोजन, 300 ग्राम फॉस्फोरस, 700 ग्राम पोटाश और 80 से 100 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए.

केले की खेती में टिशू कल्चर पौधों को दें प्राथमिकता

केले की खेती करने वाले किसानों को स्वस्थ सकर्स (पुतली) अथवा टिशू कल्चर से तैयार पौधों का उपयोग करने की सलाह दी गई है. इससे रोगमुक्त और बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना रहती है.

लंबी किस्मों जैसे अल्पन, मुठिया, मालभोग, चिनिया और जी-9 की रोपाई 2×2 मीटर की दूरी पर तथा बौनी किस्मों जैसे ग्रैंड नैन, रोबस्टा और बसराई की रोपाई 1.5×1.5 मीटर की दूरी पर करने की सलाह दी गई है.

रोपाई से पहले पौधों का करें उपचार

वैज्ञानिकों के अनुसार केले के प्रत्येक गड्ढे में 5 किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद, 500 ग्राम अरंडी की खली, 300 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट, 100 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश तथा कीट नियंत्रण के लिए 10 ग्राम कार्बोफ्यूरॉन का उपयोग करना लाभदायक होगा. रोपाई से पहले सकर्स को कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) के घोल से उपचारित करने की सलाह दी गई है, ताकि पौधों को पनामा विल्ट जैसी फफूंदजनित बीमारियों से बचाया जा सके.


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लेखक के बारे में

Author: Girija nandan sharma

Published by: Sarfaraz Ahmad

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