ऑनलाइन जुआ ऐप के चक्कर में कर्ज के दल-दल में डूब रहे हैं युवा

ऑनलाइन जुआ ऐप के चक्कर में कर्ज के दल-दल में डूब रहे हैं युवा

अमीर बनने के चक्कर में बन रहे कर्जदार बनमा ईटहरी . क्षेत्र के युवाओं को ऑनलाइन गेम या जुआ बर्बादी के कगार में धकेल रहा है. उन्हें लगता है वे ऑनलाइन जुआ खेल कर जल्द ही लाखों करोड़ों रुपये जीत जायेंगे. इस चक्कर में युवा सारा काम धंधा छोड़कर पागलों की तरह हमेशा गेम के पीछे ही लगे रहते हैं. ये जुआ विभिन्न गेमों के नाम पर ऑनलाइन चलाया जा रहा है. मोबाइल पर इन दिनों कई गेम ऐप का तेजी से प्रचलन बढ़ रहा है. यह गेम 24 घंटा चलता है. हर 3 मिनट का गेम होता है. जिसमें लोग 10 रुपए से लेकर दस से बीस हजार तक लगा देते हैं. इन सब गेम खेलने के दौरान जो जितना ज्यादा हारता है वो उतना ही ज्यादा खेलना चाहता है. इसमें कुछ ही जीत पाते हैं. ज्यादातर युवा हारते ही हैं. हारने वाले युवक पांच रुपये ब्याज पर पैसे लेकर पुनः सट्टा खेलते हैं. इस तरह दिन प्रतिदिन हार कर कर्ज के दलदल में फसंते रहते हैं. ऐप के चक्कर में गरीब युवा भी फंस रहे ऐप का चस्का गरीब तबके के लोगों को भी लगता जा रहा है. जो दिनभर मजदूरी कर गेम में लगाकर करोड़पति बनने का ख्वाब देखते हैं. इस गेम ऐप में अन्य लोगों को जोड़ने के लिए प्रति व्यक्ति 150 से दो सौ रुपया दिया जाता है. इस तरह अधिकतर युवा गेम का प्रचार प्रसार करते हैं. इस दौरान गेम खेलने वाले युवकों का एक व्हाट्सएप टीम बनाया जाता है. जिसमें उपर से जो दिशा निर्देश दिया जाता है उसके अनुसार उसे गेम खेलना पड़ता है. अलग अलग गेम ऐप खेलने वाले प्रियनगर के सिंटू कुमार, पवन कुमार, विवेक कुमार, सौरव कुमार ने बताया कि उसे एक दोस्त ने यह ऐप दिया था. उसने मजाक-मजाक में ही एक हजार रुपए से खेलना शुरू किया. शुरूआती हजार दो हजार जीत के बाद लोभ में अब तक 24 हजार रुपए हार चुके हैं. ईटहरी के मिथिलेश ने पांच सौ रुपये से खेलना शुरू कर 15 हजार हारा, नीरज ने छह हजार, आलोक, दिलखुश, साजन सहित दर्जनों युवा अब तक हजारों रुपए तक हार चुके हैं.

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