सुरक्षित स्थान में आवासित किशोरों के लिए आयोजित 10 दिवसीय हस्तकला एवं योग प्रशिक्षण कार्यशाला का बुधवार को विधिवत समापन हो गया. प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक 'किलकारी' के सहयोग से यह विशेष प्रशिक्षण दो जुलाई से 14 जुलाई तक आयोजित किया गया था, जिसमें बच्चों ने विभिन्न प्रकार के हुनर सीखकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया.
कागज से बनाए शिवलिंग और मोबाइल के आकर्षक मॉडल, योग से सीखी निरोग काया
इस 10 दिवसीय कार्यशाला के दौरान आवासित किशोरों ने पूरे उत्साह और बढ़-चढ़कर विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया. बच्चों ने हस्तकला (क्राफ्ट्स) के तहत वेस्ट और रंगीन कागजों का उपयोग कर बेहद खूबसूरत शिवलिंग, कटोरा, प्लेट, मोबाइल फोन और फूल सहित कई आकर्षक मॉडल तैयार किए. इसके अलावा बच्चों को नियमित रूप से योगाभ्यास कराया गया और उनके मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए कई मनोरंजक व ज्ञानवर्धक खेल भी खिलाए गए. प्रशिक्षकों के मुताबिक, ऐसी गतिविधियों से बच्चों में आत्मविश्वास, सकारात्मक ऊर्जा और छिपी हुई रचनात्मकता बाहर आती है.
मानसिक विकास और कौशल संवर्धन के लिए ऐसे कार्यक्रम जरूरी: प्रधान दंडाधिकारी
समापन समारोह के मुख्य अतिथि और किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी पियूष पायल ने बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडलों की सराहना की और उनका हौसला बढ़ाया.
"आवासित किशोरों के सर्वांगीण व मानसिक विकास, कौशल संवर्धन (Skill Development) और कुछ नया सीखने की उत्सुकता को बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने बेहद जरूरी हैं. यह रचनात्मकता इन बच्चों के भीतर सुधार लाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में एक बेहतर नागरिक के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित होगी." — पियूष पायल, प्रधान दंडाधिकारी, किशोर न्याय परिषद सहरसा
गरिमामय उपस्थिति के बीच बच्चों को किया गया प्रोत्साहित
कार्यशाला के सफल समापन के अवसर पर किशोरों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई और उन्हें जीवन में सकारात्मक मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई. इस मौके पर किशोर न्याय परिषद की सम्मानित सदस्य डॉ. शिवानी चौधरी सहित अजय कुमार सिंह, रंजय कुमार, राजीव रंजन, दिलीप कुमार, नरगिस सिन्हा एवं दीपक कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे और बच्चों का मार्गदर्शन किया.
