सरकार, शिक्षा विभाग व परीक्षा आयोजक संस्थाओं पर उठाये गंभीर सवाल

टीआरई-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है.

टीआरई-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में गहरा असंतोष

सहरसा. टीआरई-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है. इसी कड़ी में बुधवार को पटेल मैदान में छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में अभ्यर्थियों के साथ एक बैठक आयोजित की गयी. जिसमें सरकार, शिक्षा विभाग और परीक्षा आयोजक संस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाया गया. बैठक में दिलीप कुमार ने कहा कि टीआरई-4 का विज्ञापन सभी रिक्त पदों पर, सभी विषयों के लिए जल्द जारी किया जाना चाहिए, नहीं तो आंदोलन और तेज किया जायेगा. दिलीप कुमार ने कहा कि वर्तमान में लगभग एक लाख 20 हजार पद रिक्त हैं. लेकिन इसके बावजूद टीआरई-4 का विज्ञापन अब तक जारी नहीं किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और शिक्षा विभाग जानबूझकर प्रक्रिया को लटकाना चाह रहे हैं. उन्होंने बताया कि बीपीएससी द्वारा जारी परीक्षा कैलेंडर में टीआरई-4 की परीक्षा तिथि सितंबर के अंत में दिखाई गयी है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भर्ती प्रक्रिया को टालने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि म्यूजिक टीचर, फिजिकल टीचर, कंप्यूटर टीचर, जियोग्राफी, पॉलिटिकल साइंस सहित सभी विषयों में जितनी भी रिक्तियां हैं, उन सभी पर एक साथ विज्ञापन आना चाहिए. केवल कुछ चुनिंदा विषयों को प्राथमिकता देना और अन्य विषयों को हाशिए पर डालना न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के लिए भी घातक है.

जल्द विज्ञापन जारी नहीं होने पर हर जिले में आंदोलन की दी चेतावनी

छात्र नेता ने चेतावनी दी कि यदि जल्द विज्ञापन जारी नहीं हुआ तो आंदोलन सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि इस बार बिहार के हर जिले में आंदोलन होगा. अब यह लड़ाई सिर्फ राजधानी की नहीं है, यह पूरे बिहार के युवाओं की लड़ाई है. टीआरई-4 के साथ-साथ दिलीप कुमार ने वन कैंडिडेट, वन रिजल्ट की मांग भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए परिणाम जारी होने से पहले प्रमाण-पत्रों की जांच अनिवार्य की जाये. साथ ही टीआरई 1, 2 और 3 में जिन अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाई है, उस पर कार्रवाई की जाये. उन्होंने लाइब्रेरियन की बहाली की मांग करते हुए कहा कि पुस्तकालय शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इस दिशा में सरकार गंभीर नहीं दिख रही है. इसके अलावा बीएसएससी द्वितीय इंटर स्तरीय परीक्षा और बीएसएससी सीजीएल-4 की परीक्षा तिथि जल्द घोषित करने की भी मांग की. संविदा वेटेज को लेकर दिलीप कुमार ने कहा कि यह वेटेज भ्रष्टाचार का नया रास्ता बन चुका है और इसे तत्काल हटाया जाना चाहिए. उनका आरोप था कि इससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो रहा है. शारीरिक शिक्षक और म्यूजिक टीचर को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार की नीति पूरी तरह से विरोधाभासी है. एक तरफ सरकार मेडल लाओ नौकरी पाओ की बात करती है, वहीं दूसरी ओर फिजिकल टीचर की बहाली नहीं करती है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब शारीरिक शिक्षक ही नहीं होंगे तो छात्र खेलों में आगे कैसे बढ़ेंगे और मेडल कैसे लायेंगे. म्यूजिक टीचर के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि संगीत शिक्षा व्यक्तित्व विकास का अहम हिस्सा है, जब म्यूजिक के शिक्षक ही नहीं होंगे तो यह विषय पढ़ायेगा कौन. उन्होंने कहा कि वर्षों से इस विषय को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. बैठक में सैकड़ों अभ्यर्थियों ने भाग लिया.

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