बाढ़ प्रभावित विभिन्न गांवों में पाठशाला पुस्तकालय की हुई शुरुआत

बाढ़ प्रभावित विभिन्न गांवों में पाठशाला पुस्तकालय की हुई शुरुआत

बच्चों को उपलब्ध करायी गयी पाठ्य पुस्तकें सहरसा. जिले के सिमरी बख्तियारपुर एवं महिषी प्रखंड के गैमरहो बांध के नीचे बसे बाढ़ प्रभावित गांव धनोजा, घोघसम, बिसनपुर, सिरवार व वीरवार के स्थानीय लोगों के सहयोग से समग्र ग्राम सेवा समिति द्वारा गुरुवार को पाठशाला पुस्तकालय की शुरूआत हुई. समग्र ग्राम सेवा समिति की इस पहल से ग्रामीणों में उत्साह है. इस कैंपेन को डॉ श्रीमंत जैनेन्द्र ने पानी पर पाठशाला नाम दिया. इसमें बच्चों को पाठ्य-पुस्तकें व स्टेशनरी का समान भी उपलब्ध करायी जा रही है. स्थानीय लोगों ने कहा कि बाढ़ के बावजूद हमारे बच्चों की पढ़ाई अब नहीं रुकेगी. यह पहल सरकार द्वारा चिह्नित बाढ़ शिविर स्थलों के निकट की जा रही है. जब तक शरणार्थी व उनके बच्चे शिविरों में रुकेंगे तब तक इस कैंपेन को जारी रखा जायेगा. इस कैंपेन से जुड़े कोसी पर रिसर्च कर रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी रमेश कुमार ने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल है. पंडित जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में इसी तरह का काम एक जमाने में भारत सेवक समाज किया करता था. अगस्त 1952 में बना भारत सेवक समाज कोसी के इलाके में बांध बनाने एवं बाढ़ विपदा के समय एनसीसी, एसीसी, जिला कांग्रेस कमिटी, बिहार खादी समिति, गुजरात व्यापार मंडल संगठन जैसे संगठनों के साथ जुड़कर काम करती थी. जो कोसी बाढ़ पीड़ितों के बच्चों की शिक्षा एवं कोसी जन स्वास्थ्य उपचार के लिए कई रचनात्मक पहल को बल देते थे. इसके अतिरिक्त भारतीय सेवक समाज संगठन स्कूल, कॉलेज व यूनिवर्सिटी के बच्चों को भी ऐसे सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करती थी. आज ऐसे विपदा के घड़ी में एनएसएस, एनसीसी जैसे अन्य संगठन को ऐसे काम के लिए सक्रिय रूप से जोड़ने की जरूरत है. समग्र ग्राम सेवा समिति की इस पहल में गुड्डू कुमार शर्मा, निक्कू, अंशु, कृष्णा व मोहनियां-गलफरिया के ग्रामीणवासी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

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By Dipankar Shriwastaw

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