Madhu Shravani Festival: सौरबाजार (सहरसा). सावन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से आरंभ होने वाला मधुश्रावणी पर्व मिथिला क्षेत्र की नवविवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है. यह पर्व सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि तक चलता है. इस दौरान नवविवाहिताएं प्रतिदिन मां गौरी और मां विषहारा की पूजा-अर्चना करती हैं तथा धार्मिक कथाओं का श्रवण कर सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं.
मिथिला की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है मधुश्रावणी
मधुश्रावणी पर्व मिथिला की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इस दौरान नवविवाहिताओं के लिए विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं. पूजा-पाठ, कथा श्रवण और पारंपरिक विधि-विधान के माध्यम से वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि एवं पति की दीर्घायु की कामना की जाती है.
ससुराल से भेजी जाती हैं पूजा और श्रृंगार की सामग्री
पर्व के अवसर पर ससुराल पक्ष की ओर से नवविवाहिता के लिए वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पूजा सामग्री, मिठाई, पूरी-पकवान, केला, सेव, किशमिश, काजू तथा चूड़ा-दही सहित विभिन्न प्रकार की सामग्री भेजी जाती है. अंतिम दिन विशेष पूजा-अर्चना के बाद नवविवाहिता को पारंपरिक भोजन कराया जाता है और विधि-विधान के साथ पर्व का समापन होता है.
रामपुर गांव में श्रद्धा से निभाई जा रही परंपरा
सौरबाजार प्रखंड की गम्हरिया पंचायत स्थित रामपुर गांव में जालंधरनाथ धाम महादेव मंदिर के प्रधान पुजारी गौरीशंकर बाबा की छोटी पुत्री रक्षा देवी एवं पुत्रवधू महिमा देवी भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ मधुश्रावणी पर्व मना रही हैं. दोनों नवविवाहिताएं मां गौरी एवं मां विषहारा की पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु और अखंड सुहाग की कामना कर रही हैं.
गांवों में दिख रहा उत्सव का माहौल
Madhu Shravani Festival: मधुश्रावणी पर्व को लेकर गांवों में पारंपरिक उल्लास का वातावरण बना हुआ है. महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रही हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस पर्व के विधिवत पालन से वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
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