वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भगवान श्री चित्रगुप्त पूजा संपन्न

वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भगवान श्री चित्रगुप्त पूजा संपन्न

श्रद्धालुओं के बीच बांटा गया महाप्रसाद सहरसा . नगर निगम क्षेत्र के गंगजाला वार्ड 16 में हर वर्ष की भांति इस बार भी युवाओं द्वारा प्रतिमा स्थापित कर वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भगवान श्री चित्रगुप्त पूजा संपन्न हुआ. पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद बांटा गया. शाम में पूजन स्थल पर ही भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया है. पौराणिक आख्यानों के अनुसार सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्माजी चिंतातुर हो गये. चिंता का कारण था सकल सृष्टि की देखरेख व लेखा-जोखा रखना. कोई उपाय नहीं सूझने पर ब्रह्माजी 12 हजार वर्ष की अखंड समाधि में लीन हो गये. इसके बाद उनकी काया से एक तेजस्वी बालक का जन्म हुआ. जिनका नाम ब्रह्माजी ने कायस्थ रखा व कहा कि समस्त जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखना ही तुम्हारा दायित्व है. युवावस्था में उनका विवाह इरावती व शोभावती नामक कन्या से हुआ. जिनकी प्रथम पत्नी से चार एवं द्वितीय से आठ पुत्र उत्पन्न हुए. इन पुत्रों का नामकरण इनके शासित प्रदेश के आधार पर क्रमश: श्रीवास्तव, निगम, कर्ण, कुलश्रेष्ठ, माथुर, सक्सेना, गौड़, अस्थाना व वाल्मिकी किया गया. आज भी कायस्थ वंश की उपजातियां इन्हीं नामों से अपनी पहचान कायम रखे हैं. कार्यक्रम में मुख्य रूप से संजय सिंह, सिद्धार्थ सिन्हा, अभिनव सिन्हा, सानू सिन्हा, देव सिन्हा, शिवम वर्मा, संजू सिंह, चीकू सिन्हा, अंकित सिन्हा, रौनक, विक्रम, भानु, प्रिंस आनंद, जानू, कार्तिक सिन्हा, अंकित सिन्हा, कवि सिन्हा, शिवम, रमण सिंह, सुमित सिंह, आदित्य झा, कृषु सिन्हा, मयंक गुप्ता, अंश कुमार, ओम कुमार, निशांत झा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.

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By Dipankar Shriwastaw

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