आचार संहिता की भेंट चढ़ा दो करोड़ से अधिक की राशि से लगा साइन बोर्ड

नगर निगम के सभी 46 वार्डों में पिछले कुछ महीने पूर्व दो करोड़ से अधिक की राशि से लगाया गया साइन बोर्ड आचार संहिता की भेंट चढ़ गया.

नगर निगम के बोर्ड में महापौर व उप महापौर का नाम होना बनी समस्या

सहरसा. नगर निगम के सभी 46 वार्डों में पिछले कुछ महीने पूर्व दो करोड़ से अधिक की राशि से लगाया गया साइन बोर्ड आचार संहिता की भेंट चढ़ गया. साइन बोर्ड में महापौर एवं उपमापौर का नाम रहना इसे हटाने का कारण बन गया. जिससे लगभग ढाई करोड़ की राशि का खर्च निर्रथक हो गया. इसके साथ ही इसे हटाने में अलग से धन बल की हानि हुई. इस साइन बोर्ड को उखाड़कर निगम परिसर में जमा कर दिया गया है. मालूम हो कि निगम के सभी 46 वार्डों सहित सभी मुख्य चौक चौराहे, कार्यालय के निकट 800 साइन बोर्ड लगाया गया था, जिसका कार्य पिछले फरवरी माह में ही संपन्न हुआ था. स्टील निर्मित इस बोर्ड पर 30 हजार 200 रुपये प्रति बोर्ड का टेंडर किया गया था. जिसके तहत पूरे नगर निगम क्षेत्र में 800 साइन बोर्ड लगाया गया था. मात्र आठ महीने में ही कुछ तकनीकी गलती के कारण हटाना पड़ा. बोर्ड में महापौर एवं उप महापौर का नाम नहीं होने मात्र से आचार संहिता का उल्लंघन नहीं हो पाता एवं लोगों को चौक चौराहे एवं कार्यालय के नाम का पता मिलता रहता.

सभी वार्डों में लगा था दर्जनों बोर्ड

नगर निगम के सभी 46 वार्डों में लगभग दो दर्जन से अधिक बोर्ड लगाया गया था. वार्ड के प्रत्येक पथ में इसे लगाया गया था. तत्कालीन नगर आयुक्त अनुभूति श्रीवास्तव के कार्यकाल में अरनव इंपोरिया को टेंडर आवंटित किया गया था. जिसे पूरे नगर निगम क्षेत्र में फरवरी 2025 तक साइन बोर्ड लगाने का कार्य आवंटित किया गया था, जिसके लिए प्रति साइन बोर्ड 30 हजार 200 रुपये निर्धारित की गयी थी. निगम क्षेत्र में 800 साइन बोर्ड लगाने का टेंडर हुआ था, जिसके तहत दो करोड़ 41 लाख से अधिक की राशि इस साइन बोर्ड के लिए खर्च की गयी थी, जो अब नगर निगम परिसर में कचड़े का ढेर बन गया है.

आचार संहिता लगने के बाद प्रशासनिक निर्देश के आलोक में नगर निगम क्षेत्र में लगे लगभग 800 साइन बोर्ड को हटाया गया है. आदर्श आचार संहिता को देखते यह कदम उठाया गया है. महापौर एवं उप महापौर का पद राजनीतिक होता है, इसे देखते हुए इसे सुरक्षित हटाया गया है. साइन बोर्ड को सुरक्षित हटाकर नगर निगम कार्यालय में परिसर में रखा गया है. महापौर एवं उप महापौर चुनाव के बाद अगर चाहेंगे तो फिर से लगाया जा सकता है. साइन बोर्ड को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है.

प्रभात कुमार झा, आयुक्त, नगर निगमB

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By Dipankar Shriwastaw

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