Saharsa News: सहरसा जिले के सलखुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में गुरुवार को जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा के तहत परिवार नियोजन शिविर आयोजित किया गया. शिविर में 20 महिलाओं का सफलतापूर्वक बंध्याकरण ऑपरेशन किया गया. स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी लाभार्थियों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई गईं और सरकार द्वारा निर्धारित प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई. चिकित्सकीय टीम ने ऑपरेशन के बाद महिलाओं के स्वास्थ्य की निगरानी भी की.
विशेषज्ञ चिकित्सक के नेतृत्व में हुए सभी ऑपरेशन
शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार संत के नेतृत्व में सभी बंध्याकरण ऑपरेशन किए गए.
इस दौरान ओटी असिस्टेंट कुणाल प्रताप और जीएनएम आभा कुमारी, नीरू कुमारी, श्वेता कुमारी तथा सोनी कुमारी ने ऑपरेशन प्रक्रिया में सहयोग किया.
ऑपरेशन से पहले सभी महिलाओं की आवश्यक स्वास्थ्य जांच की गई और चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त पाए जाने के बाद ही प्रक्रिया पूरी की गई.
ऑपरेशन के बाद मुफ्त दवा और प्रोत्साहन राशि
सीएचसी प्रभारी डॉ. धीरज कुमार ने बताया कि बंध्याकरण ऑपरेशन के बाद सभी महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क दवाइयां दी गईं.
इसके साथ ही सरकार की ओर से परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत निर्धारित प्रोत्साहन राशि भी लाभार्थियों को उपलब्ध कराई गई.
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद महिलाओं की चिकित्सकीय निगरानी की गई, ताकि किसी प्रकार की जटिलता की स्थिति में तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके.
परिवार नियोजन को लेकर किया गया जागरूक
शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महिलाओं और उनके परिजनों को परिवार नियोजन के महत्व के बारे में जानकारी दी.
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा के तहत लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों की जानकारी देने के साथ सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है.
Saharsa News: स्वास्थ्यकर्मियों की रही सक्रिय भूमिका
इस शिविर को सफल बनाने में काउंसलर किशन कुमार सहित सीएचसी के अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई.
टीम ने ऑपरेशन के बाद लाभार्थियों को आवश्यक सावधानियां, दवा सेवन, आराम और आगे की स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी.
स्थानीय लोगों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के परिवार नियोजन शिविर महिलाओं को सुरक्षित और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ जनसंख्या नियंत्रण और मातृ स्वास्थ्य जागरूकता को भी मजबूत करते हैं.
