समाज कल्याण विभाग की योजनाओं में बिचौलियों और अधिकारियों के गठजोड़ से हो रहा भ्रष्टाचार प्रभात खबर इंपैक्ट नवहट्टा . भले ही बाल विकास परियोजना को सरकार द्वारा समाज कल्याण विभाग के श्रेणी में रखकर समाज कल्याण के लिए दर्जनों योजनाएं संचालित की जा रही हों. लेकिन समाज कल्याण विभाग से समाज का कम, पद पर पदस्थापित सेविकाओं, पर्यवेक्षिकाओं सहित अन्य अधिकारियों का कल्याण हो रहा है. प्रखंड क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल बदतर बना हुआ है. आंगनबाड़ी केंद्रों की सच्चाई प्रभात खबर में प्रकाशित होने पर सीडीपीओ द्वारा खानापूर्ति के लिए भले ही स्पष्टीकरण पूछा जाता हो, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जाता है. प्रभात खबर में समाचार छपने पर भले ही एक सप्ताह दस दिन केंद्र की स्थिति में सुधार हो जाती है. लेकिन विभागीय कर्मियों व अधिकारियों की मिलीभगत से फिर वही कहानी सप्ताह में एक दिन केंद्र खोलकर साप्ताहिक फोटोग्राफी पर ही चलती रहती है. इसमें न केवल आंगनबाड़ी सेविका दोषी है. बल्कि उस समाज के लोग भी दोषी हैं. जिनके बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे या पोषाहार से वंचित हो रहे हैं. उससे भी दोषी उस पंचायत के जनप्रतिनिधि हैं. जिन्हें ग्राम पंचायत ने चुनकर पंचायत के प्रधान जैसे पद पर बैठाया है. वहीं विभागीय सुपरवाइजर व कार्यालय को तो सिर्फ अपनी कमीशन से मतलब है. जो सिर्फ नौकरी के नाम पर ड्यूटी निभाकर प्रति माह सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं से वसूली के लिए दर्जनों की संख्या में सीडीपीओ ऑफिस में बिचौलिए बैठाए हुए हैं. सोमवार को सीडीपीओ अनिता चौधरी ने प्रभात खबर में प्रकाशित समाचार हाटी पंचायत के केंद्र संख्या नौ की सेविका मीना देवी से स्पष्टीकरण पूछा है. वहीं 24 घंटे में जवाब समर्पित करने का निर्देश दिया है. वहीं संबंधित सुपरवाइजर से भी जांच प्रतिवेदन दो दिनों के अंदर समर्पित करने का निर्देश दिया है. अब सवाल यह है क्या प्रखंउ क्षेत्र के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के हालात में सुधार होगा या फिर अलग-अलग केंद्रों के समाचार छपने के बाद स्पष्टीकरण का खेल चलता रहेगा.
समाचार छपने पर बाराही आंगनबाड़ी सेविका से सीडीपीओ ने पूछा स्पष्टीकरण
समाचार छपने पर बाराही आंगनबाड़ी सेविका से सीडीपीओ ने पूछा स्पष्टीकरण
