2017 तक पूरा हो जायेगा काम

बीपी मंडल सेतु. तेज हुआ निर्माण, खगड़िया की राह होगी आसान कोसी-बागमती नदी के संगम पर डुमरी घाट स्थित एनएच 107 के क्षतिग्रस्त बीपी मंडल सेतु जीर्णोद्धार का कार्य अब जोड़ पकड़ चुका है और वर्तमान में पाया धंसाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है. निर्माण कंपनी का कहना है कि दोनों पाया का निर्माण […]

बीपी मंडल सेतु. तेज हुआ निर्माण, खगड़िया की राह होगी आसान

कोसी-बागमती नदी के संगम पर डुमरी घाट स्थित एनएच 107 के क्षतिग्रस्त बीपी मंडल सेतु जीर्णोद्धार का कार्य अब जोड़ पकड़ चुका है और वर्तमान में पाया धंसाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है. निर्माण कंपनी का कहना है कि दोनों पाया का निर्माण कार्य दिसंबर तक पूर्ण कर लिया जायेगा.
सहरसा/सिमरी : हावड़ा ब्रिज के तर्ज पर दो पाया पर बनने वाले बीपी मंडल पुल के दोनों पाया का निर्माण कार्य एक साथ चल रहा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस गति से निर्माण कार्य किया जा रहा है, जुलाई 2017 तक यह पूर्ण हो जायेगा. कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर भी कहते हैं कि सबकुछ ठीक-ठाक रहा, तो उपरोक्त अवधि में हम कार्य पूरा कर लेंगे. जानकारी के मुताबिक कोसी का पानी घटने से कार्यस्थल के समीप नदी लगभग सूख चुकी है और ऐसे में संवेदक को कार्य करने में सहूलियत हो रही है. वहीं धंसाये जा रहे पाया नंबर दो के कुएं की खुदाई के क्रम में अब कभी-कभार ही बोल्डर मिलने से कार्य में तेजी आयी है.
वर्ष 2010 में क्षतिग्रस्त पाया को बचाने के लिए डाले गए थे बोल्डर: उल्लेखनीय है कि कुंआ नंबर दो के 15 से 33 मीटर के बीच खुदाई करने के दौरान लगातार बोल्डर निकलने से कार्य एजेंसी के लिए यह परेशानी का सबब बना हुआ था. बताते चलें कि वर्ष 2010 में बीपी मंडल सेतु का पाया धंसने के बाद इसे बचाने के लिए बोल्डर बेडवार का निर्माण कर क्षतिग्रस्त पाया के समीप डाला गया था और यह लगातार पुल के जीर्णोद्धार कार्य में बाधा बन रहा था.
जानकारी के मुताबिक रविवार तक सेतु के उत्तरी छोड़ के पाया नंबर दो के लिये 35 मीटर कुंआ को धंसाया जा चुका है. वहीं पहले पाया को 50 मीटर धंसाने का कार्य अब पूर्ण कर लिया गया है. सनद रहे कि पाया संख्या दो से करीब डेढ़ माह बाद पाया नंबर एक को धंसाने का कार्य आरंभ किया गया था.
2014 में बह गया था स्टील पाइल ब्रिज
2010 में धंस गया था पुल का पाया
सहरसा व खगड़िया जिले की सीमा पर स्थित डुमरी पुल जो कोसी एवं बागमती नदी के संगम पर इस पुल के बन जाने से कई शहरों की दूरी कम हो गयी थी तो बाहर से आने वाले कई महत्वपूर्ण सामान की कीमत सामान्य लोगों की पहुंच तक आ गयी थी. वही पुल पर लगातार आवागमन होने से इलाके के दर्जनों गांव के लोगों को रोजगार का मौका भी मिल गया था. लेकिन 29 अगस्त 2010 को पुल के छठे पाये के धंस जाने के कारण करीब 6 वर्षो की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी परिचालन शुरू अब तक नही हो पाया है. करीब 1 साल पूर्व पुल के पुनर्निर्माण का काम शुरू भी हुआ, जो अभी भी जारी है. आवागमन की सुविधा बहाल करने के लिए पुल के समांतर स्टील पाइल ब्रिज को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बनाया गया था वह पुल भी 19 अगस्त 2014 को तेज धारा में बह गया जिससे लोगों की परेशानी काफी बढ़ गयी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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