Rajya Sabha Election 2026: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाली जंग अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गई है. जहां एक ओर एनडीए अपनी चार सीटों पर गणित बिठा रहा है,वहीं विपक्षी खेमे में आरजेडी ने ‘एक सीट’ पर कब्जा जमाने के लिए एक नया और चौंकाने वाला फॉर्मूला पेश किया है.
आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने सुझाव दिया है कि अगर पूर्व सांसद दिवंगत शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को मैदान में उतारा जाता है, तो विपक्ष न केवल एकजुट होगा बल्कि जीत भी सुनिश्चित कर लेगा.
भाई वीरेंद्र का ‘अकलियत’ कार्ड
आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए कहा कि राज्यसभा की इस सीट पर किसी अकलियत (अल्पसंख्यक) चेहरे को मौका मिलना चाहिए. उन्होंने हिना शहाब का नाम लेते हुए तर्क दिया कि चुनाव जीतने के लिए ‘गोटी बैठाना’ पड़ता है.
भाई वीरेंद्र के मुताबिक, हिना शहाब एक ऐसी उम्मीदवार हो सकती हैं जिनके नाम पर विपक्षी दलों के बीच आम सहमति बन सकती है. उनका इशारा साफ था कि अगर आरजेडी हिना शहाब को टिकट देती है, तो ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के लिए उनका विरोध करना मुश्किल होगा. यह फॉर्मूला न केवल आरजेडी के पुराने वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश है, बल्कि बिखरे हुए विपक्ष को एक मंच पर लाने की कवायद भी मानी जा रही है.
AIMIM की दावेदारी से समीकरण जटिल
एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने पहले ही घोषणा कर दी है कि उनकी पार्टी राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगी. ईमान का कहना है कि यदि विपक्ष वास्तव में सांप्रदायिक शक्तियों को रोकना चाहता है, तो उसे एआईएमआईएम के उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए.
भाई वीरेंद्र ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि चुनाव के समय हर कोई दावेदारी करता है, लेकिन अंततः समीकरण ही काम आते हैं. आरजेडी खेमे को भरोसा है कि हिना शहाब के नाम पर ओवैसी के विधायकों का समर्थन हासिल किया जा सकता है, जिससे एनडीए के क्लीन स्वीप के सपनों पर पानी फेरा जा सके.
हिना शहाब की राजनीतिक पृष्ठभूमि
हिना शहाब दिवंगत बाहुबली नेता और पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन की पत्नी हैं. वे 2009 से लोकसभा चुनाव लड़ती रही हैं, लेकिन जीत नहीं मिली. 2024 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था. फिलहाल उनके बेटे ओसामा शहाब राजद विधायक हैं, जिससे उनका राजनीतिक आधार अब भी मजबूत माना जाता है.
बिहार में पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं. संख्या के हिसाब से सत्तारूढ़ गठबंधन मजबूत है, जबकि विपक्ष एक सीट जीतने की रणनीति बना रहा है. ऐसे में उम्मीदवार चयन और समर्थन का गणित ही तय करेगा कि विपक्ष अपनी मौजूदगी दर्ज करा पाता है या नहीं.
