पूर्णिया : बिहार राज्य महिला आयोग की ओर से आयोजित ‘महिला आयोग आपके द्वार’ कार्यक्रम के तहत पूर्णिया में दो दिवसीय जनसुनवाई की गयी. आयोग की अध्यक्ष अप्सरा और सदस्य साधना ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं महिलाओं की समस्याएं सुनीं. दो दिनों में कुल 232 मामले सामने आये, जिनमें 172 मामलों का ऑन द स्पॉट निष्पादन किया गया. वहीं 60 जटिल मामलों को आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना स्थित आयोग के मुख्यालय बुलाया गया है.
महिलाओं को पटना आने से मिलेगी राहत
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि सीमांचल क्षेत्र की महिलाओं को शिकायतों के समाधान के लिए पटना आने-जाने में होने वाली परेशानी और आर्थिक खर्च से बचाना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है. आयोग खुद महिलाओं के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास कर रहा है, ताकि उन्हें अपने क्षेत्र के आसपास ही न्याय मिल सके.
महिला प्रताड़ना और पारिवारिक विवाद के मामले अधिक
जनसुनवाई के दौरान महिला प्रताड़ना, पारिवारिक विवाद और जमीन से जुड़े मामले अधिक सामने आये. इसके अलावा कुछ गंभीर मामलों को भी आयोग ने संज्ञान में लिया. एक महिला शिक्षिका ने पति पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया. वहीं दो बच्चियों के अपहरण से जुड़ा मामला भी सामने आया. आयोग की अध्यक्ष ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए पूर्णिया के वरीय पुलिस अधीक्षक से बात कर आवश्यक कार्रवाई कराने की बात कही.
नाबालिग लड़कियों से घर नहीं छोड़ने की अपील
अध्यक्ष ने बताया कि करीब साढ़े 17 वर्ष की एक लड़की के घर से लापता होने का मामला भी जनसुनवाई में आया. बाद में वह एक बच्चे की मां मिली और गर्भवती भी थी. उसके पिता न्याय की गुहार लेकर आयोग पहुंचे थे. इस मामले का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष ने लड़कियों से अपील की कि वे कम उम्र में शादी न करें और किसी परेशानी की स्थिति में घर छोड़कर न जाएं. उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह और गर्भधारण से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.
महिला आयोग ने गंभीर मामलों में संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन से समन्वय कर पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने का भरोसा दिया.
