दो दिनों के अंदर दो नेत्रदान, आई बैंक जरूरी : डॉ एके गुप्ता

जिले के अब 13वें नेत्रदानी बने निर्मल किशोर अग्रवाल

जिले के अब 13वें नेत्रदानी बने निर्मल किशोर अग्रवाल

गुलाबबाग की मंजू देवी का मरणोपरांत कराया गया नेत्रदान

पूर्णिया. नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता लाने का दधीचि देहदान पूर्णिया इकाई का प्रयास अब रंग लाने लगा है. जागरूकता रैली और ब्लांइड वॉक और नुक्कड़ सभाओं की वजह से जिले के लोग अंगदान का महत्व समझने लगे हैं. शुक्रवार को जहां लोग आजादी का जश्न मना रहेथे वहीं दधीचि देहदान समिति के मेम्बरान अंगदान अभियान को सार्थक सिद्ध करने में जुटे थे.

दरअसल, 15 अगस्त को चिकित्सक डॉ एएन केजरीवाल को बहनोइ निर्मल किशोर अग्रवाल का निधन हो गया. उनके निधन के बाद केजरीवाल ने दधीचि देहदान समिति के सदस्य रवींद्र कुमार साह से संपर्क किया. श्री साह ने प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गुप्ता व जिला उपाध्यक्ष हेना सईद को इसकी सूचना दी और निर्मल किशोर अग्रवाल का नेत्रदान कराने का आग्रह किया. फिर, कटिहार मेडिकल कॉलेज की टीम को सूचित किया गया. नेत्रदान की सूचना मिलने पर कटिहार मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ अतुल मिश्रा के निर्देश पर डॉ. मासूम अपनी टीम के साथ पूर्णिया पहुंचे और निर्मल किशोर अग्रवाल के आंखों का कॉर्निया दान कराया. इसके पहले 14 अगस्त को गुलाबबाग में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवा निवृत शिक्षक सीताराम पंडित की धर्मपत्नी मंजु देवी को मरणोपरांत नेत्रदान किराया गया. मौके पर तेरापंथ युवक परिषद के पूर्व अध्यक्ष रुपेश डुंगरवाल समेत तेयुप के कई अधिकारी मौजूद थे. इस प्रकार शहर में अब नेत्रदानियों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है. इस अभियान में दधीचि देहदान समिति पूर्णिया के वरिष्ठ सदस्य प्रेम कुमार, कोषाध्यक्ष श्रवन कुमार जेजानी ने अहम भूमिका निभाई।

आई बैंक बने तो नेत्रदानियों की बढ़ेगी संख्या

नेत्रदान के अवसर पर समिति के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉक्टर अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि हमारा शहर चिकित्सा नगरी के रूप में जाना जाता है. हमारे यहां से तो अब हवाई सेवा की शुरू होने जा रही है. हवाई सफर शुरू होती है हम अब पूरे राष्ट्र से जुड़ जाएंगे. इसके बावजूद आई बैंक के अभाव में हमें दूसरे जिले की मेडिकल टीम पर निर्भर रहना पड़ता है. हमारे यहां सरकारी मेडिकल कॉलेज है. इसके बाद भी आई बैंक की स्थापना नहीं हो रही है. आई बैंक के अभाव में कई बार हमें नेत्रदान मिलने के बाद भी हम कॉर्निया का दान नहीं करा पाते हैं. ऐसे में अगर अपने शहर में आई बैंक की स्थापना हो तो नेत्रदानियों की संख्या में वृद्धि होगी. डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि मृत्यु के उपरांत 6 घंटे तक ही कॉर्निया का दान कराया जा सकता है. अत: अपने शहर में आई बैंक की स्थापना होने नेत्रदान कराने के लिए समय अधिक मिल सकेगा.

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Author: ARUN KUMAR

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