आंध्र प्रदेश से लौटे कसबा के 6 मजदूर GMCH में भर्ती, 5 की पहले ही हो चुकी है मौत; पत्थर पाउडर फैक्ट्री में करते थे काम

Migrant labour,: पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड के प्रवासी मजदूरों को लेकर एक बेहद स्तब्ध करने वाली और दुखद खबर सामने आई है. आंध्र प्रदेश की एक पत्थर निर्माण फैक्ट्री से लौटे मजदूरों में से अब तक 5 की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है, जबकि 6 अन्य मजदूरों को गंभीर हालत में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) पूर्णिया में भर्ती कराया गया है.

पूर्णिया से विकास वर्मा की रिपोर्ट

Migrant labour,: बिहार में रोजगार के अभाव में दूसरे राज्यों का रुख करने वाले सीमांचल के मजदूरों के साथ एक बड़ा और दर्दनाक हादसा सामने आया है. आंध्र प्रदेश की एक औद्योगिक कंपनी में काम करने वाले पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड के कई मजदूरों की जान पर बन आई है. मिली जानकारी के अनुसार, वहां काम करने के दौरान फेफड़ों और सांस से संबंधित गंभीर बीमारी की चपेट में आने से अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है. वहीं, घर लौटने के बाद गंभीर रूप से बीमार हुए 6 अन्य मजदूरों को आनन-फानन में इलाज के लिए जीएमसीएच पूर्णिया के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है. इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे कसबा क्षेत्र, खासकर जियनगंज और बथनाहा के प्रभावित परिवारों में चीख-पुकार और कोहराम मचा हुआ है.

मृतकों और अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे मजदूरों की सूची

इस त्रासदी का शिकार हुए हताहतों का विवरण निम्नलिखित प्रकार से है:

संदिग्ध परिस्थितियों में दम तोड़ने वाले 5 मृतक:

  1. मो. मसद (निवासी: जियनगंज, कसबा)
  2. मो. मुस्तफा (निवासी: जियनगंज, कसबा)
  3. कुंदन कुमार (निवासी: कसबा)
  4. अरविंद कुमार (निवासी: बथनाहा, झुंनी बलवा)
  5. लखिया देवी (निवासी: जियनगंज, कसबा)

जीएमसीएच पूर्णिया में इलाजरत 6 गंभीर बीमार मजदूर:

  • मो. राजी, विक्रम कुमार, श्रवण कुमार, कुपिन और सीतेश (ये सभी कसबा के जियनगंज, गंगोली, तारानगर और गढ़बनेली के निवासी हैं).

पत्थर के पाउडर (सिलिकोसिस की आशंका) से फेफड़े हुए डैमेज

बीमारी की वजह: जीएमसीएच में भर्ती बीमार मजदूर मो. राजी के भाई फरहान आलम ने बताया कि ये सभी मजदूर आंध्र प्रदेश की एक पत्थर निर्माण कंपनी में काम करते थे. वहाँ मुख्य रूप से पत्थरों को पीसकर पाउडर बनाने का काम होता था. फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों (मास्क और वेंटिलेशन) की कमी के कारण उड़ने वाला बारीक डस्ट (धूल) सांस के जरिए इन मजदूरों के फेफड़ों में जमा हो गया. घर लौटने के बाद एक-एक कर सभी को सांस लेने में भीषण तकलीफ होने लगी और देखते ही देखते 5 लोगों की मौत हो गई.

डॉक्टरों की विशेष टीम मुस्तैद, परिजनों ने की उच्च स्तरीय जांच और मुआवजे की मांग

प्रशासनिक हलचल और चिकित्सा:

वर्तमान में जीएमसीएच पूर्णिया के सीनियर डॉक्टरों की टीम इन सभी 6 बीमार मजदूरों की गंभीर स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर बनाए हुए है. सभी को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है और फेफड़ों के संक्रमण को दूर करने के लिए विशेष उपचार किया जा रहा है. अस्पताल परिसर में बीमार मजदूरों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पीड़ित परिवारों ने बिहार और आंध्र प्रदेश सरकार से इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई (FIR) करने और मृतकों व आश्रितों के लिए उचित सरकारी मुआवजे की मांग की है.

इस बीच घटना की गंभीरता को देखते हुए पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के आधिकारिक प्रतिनिधि आदिल आरजू ने जीएमसीएच पहुंचकर बीमार मजदूरों और उनके डॉक्टरों से मुलाकात की. उन्होंने पीड़ितों से पूरी घटना की विस्तृत जानकारी ली और आश्वस्त किया कि सांसद के माध्यम से इस मुद्दे को संसद में उठाने के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को हर संभव न्याय और आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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