गोरेलाल मेहता कॉलेज में स्नातक पंचम सेमेस्टर के 41 छात्रों ने लघु शोधपत्र देकर कायम की मिसाल

गोरेलाल मेहता कॉलेज

बनमनखी. बनमनखी मुख्यालय स्थित गोरे लाल मेहता कॉलेज ने शैक्षणिक क्षेत्र में एक नयी मिसाल कायम की है.पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंगीभूत इस कॉलेज में मंगलवार को स्नातक पंचम षाण्मासिकी के लघु शोध कार्य माइनर रिसर्च वर्क के तहत मौखिक परीक्षा वाइवा-वोस का आयोजन किया गया. इसमें विभिन्न विषयों के कुल 41 छात्रों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए.कार्यक्रम में पूर्णिया विश्वविद्यालय एवं बीएन मंडल विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न महाविद्यालयों के विषय विशेषज्ञों ने बाह्य परीक्षक के रूप में भाग लिया.जंतु विज्ञान विषय के लिए डॉ. प्रशांत कुमार, अंग्रेजी के लिए डॉ. हिना नकवी, हिन्दी विषय में डॉ. संजीव कुमार सुमन तथा दर्शनशास्त्र विषय में डॉ. नवल किशोर पिंटू उपस्थित रहे.इसी प्रकार इतिहास विषय में डॉ. मनोज कुमार, वनस्पति शास्त्र में डॉ. नूर आलम, मनोविज्ञान में डॉ. मिथिलेश कुमार, गणित में डॉ. रंजीत कुमार दास तथा राजनीति शास्त्र में डॉ. अवधेश कुमार ने छात्रों के शोध कार्यों का मूल्यांकन किया.विभिन्न विषयों में छात्रों की भागीदारी उल्लेखनीय रही.अंग्रेजी में 6, हिन्दी में 5, दर्शनशास्त्र में 3, इतिहास में 9, वनस्पति शास्त्र में 6, जंतु विज्ञान में 3, मनोविज्ञान में 4, गणित में 1 तथा राजनीति शास्त्र में 4 छात्रों ने वाइवा परीक्षा में हिस्सा लिया. इस अवसर पर कॉलेज के विभिन्न विभागाध्यक्ष एवं शोध निदेशक भी उपस्थित रहे.कार्यक्रम के दौरान जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अर्पिता राय, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रणविजय कुमार, हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रभूषण रजक सहित कई शिक्षकों ने छात्रों का मार्गदर्शन किया. छात्रों में जिज्ञासा, विश्लेषण क्षमता एवं अनुसंधान की प्रवृत्ति आवश्यक : डॉ प्रमोद भारतीय मौखिक परीक्षा के उपरांत कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रमोद भारतीय ने कहा कि लघु शोध कार्य छात्रों में शोधपरक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन एवं विषय की गहन समझ विकसित करने का सशक्त माध्यम है.नई शिक्षा नीति में शोध एवं व्यावहारिक ज्ञान को विशेष महत्व दिया गया है और इस प्रकार की अकादमिक गतिविधियां छात्रों को उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करती हैं.उन्होंने कहा कि केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों में जिज्ञासा, विश्लेषण क्षमता एवं अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित होना भी आवश्यक है. शोध कार्य के माध्यम से छात्र समाज, संस्कृति, शिक्षा एवं विज्ञान से जुड़े विषयों को गहराई से समझने का अवसर प्राप्त करते हैं.प्रधानाचार्य ने सभी विभागाध्यक्षों, शोध निदेशकों एवं बाह्य विशेषज्ञों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षकों के मार्गदर्शन से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं शोध संस्कृति का विकास संभव है.उन्होंने छात्रों को निरंतर अध्ययनशील रहने, अनुशासन बनाए रखने तथा अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्रहित में करने की प्रेरणा दी.मौके पर अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. रमीज अहमद, प्रधान सहायक बाबुल कुमार शर्मा सहित कॉलेज परिवार के अन्य सदस्य मौजूद.

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