विभागीय पेंच में उलझा हाजीपुर का वॉटर टावर, करोड़ों की योजना ठप होने से हजारों आबादी पानी को मोहताज

PHED Bihar: वैशाली के महुआ में 50 हजार गैलन क्षमता वाला जलमीनार 15 वर्षों से बंद पड़ा है. पीएचईडी और नगर परिषद के बीच जिम्मेदारी के विवाद में करोड़ों की योजना ठप है, जबकि लोग पेयजल संकट झेल रहे हैं.

PHED Bihar: (गोपाल राय) एक ओर सरकार हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है, वहीं वैशाली जिले के महुआ बाजार में 50 हजार गैलन क्षमता वाला जलमीनार पिछले लगभग 15 वर्षों से बंद पड़ा है. भीषण गर्मी के मौसम में हजारों लोग स्वच्छ पेयजल के लिए परेशान हैं, जबकि करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह महत्वाकांक्षी योजना विभागीय पेंच में फंसकर बेकार साबित हो रही है.

2011-12 में तैयार हुआ था जलमीनार

स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2011-12 में महुआ बाजार और आसपास के क्षेत्रों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड कार्यालय परिसर में 50 हजार गैलन क्षमता वाले जलमीनार का निर्माण कराया गया था. इसके साथ ही बाजार क्षेत्र के बड़े हिस्से में पाइपलाइन भी बिछाई गई थी. बिजली कटौती के दौरान भी जलापूर्ति जारी रखने के लिए लाखों रुपये की लागत से जेनरेटर की खरीदारी की गई थी.

सांकेतिक तस्वीर

करोड़ों खर्च, लेकिन आज तक नहीं शुरू हुई योजना

स्थानीय व्यवसायियों और नागरिकों का कहना है कि जलमीनार निर्माण के बाद कभी नियमित रूप से चालू नहीं हो सका. वर्षों से लोग इसे शुरू कराने की मांग करते आ रहे हैं. कई बार जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों ने विभाग को आवेदन भी दिया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ.

भीषण गर्मी में पानी के लिए परेशान लोग

महुआ बाजार आने वाले लोगों को गर्मी के दिनों में बोतलबंद पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जलमीनार चालू हो जाए तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती है.

सांकेतिक तस्वीर

नगर परिषद और पीएचईडी के बीच फंसा मामला

बताया जाता है कि जलमीनार का संचालन नगर परिषद और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के बीच समन्वय की कमी के कारण अटका हुआ है. दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता नहीं होने से करोड़ों रुपये की योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही है.

सांकेतिक तस्वीर

स्थानीय लोगों में बढ़ रही नाराजगी

महुआ विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय सिंह बिहार सरकार में पीएचईडी मंत्री भी रह चुके हैं. इसके बावजूद वर्षों से बंद पड़े जलमीनार को चालू नहीं कराया जा सका. इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

क्या कहते हैं पीएचईडी के अधिकारी

हाजीपुर के कार्यपालक अभियंता अंजनी कुमार ने बताया कि महुआ का जलापूर्ति केंद्र विभाग द्वारा बनाकर नगर परिषद को सौंप दिया गया है. जलमीनार बंद रहने के संबंध में नगर परिषद ही जानकारी दे सकती है.

क्या कहते हैं नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी

नगर परिषद महुआ के कार्यपालक पदाधिकारी सोनू कुमार ने कहा कि जलमीनार पीएचईडी विभाग का है. इसकी वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त कर आवश्यक पहल की जाएगी.

सवालों के घेरे में करोड़ों की योजना

करीब डेढ़ दशक से बंद पड़े जलमीनार ने सरकारी योजनाओं की निगरानी और विभागीय समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि जनता को लाभ नहीं मिल रहा है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए.

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By Vivek Ranjan

विवेक रंजन पाण्डेय पिछले आठ वर्षों से मुख्यधारा की पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टीवी मीडिया से की, जहां बिहार की राजनीति से जुड़े कई प्रमुख नेताओं और जनप्रतिनिधियों के इंटरव्यू किए. वर्तमान मुख्यमंत्री के उपमुख्यमंत्री रहते हुए उनका इंटरव्यू करने के साथ-साथ उन्होंने कई मंत्रियों के इंटरव्यू और फील्ड रिपोर्टिंग भी की है.

ज्ञान की धरती नालंदा के रहने वाले विवेक रंजन पाण्डेय वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और विभिन्न स्रोतों से जानकारी का सत्यापन करना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है. बिहार की राजनीति, शिक्षा और छात्र मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा प्रशासन, अपराध, रोजगार, मौसम और स्थानीय मुद्दों पर भी वह लगातार खबरें तैयार करते हैं.

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उन्होंने आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी, पटना से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की है.

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