बिहार पुलिस में 40 साल तक फर्जी नाम से नौकरी, फुफेरे भाई के दस्तावेज से बना सिपाही, दरोगा बनकर रिटायर

Bihar Police: बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जांच में पाया गया है कि एक ही नाम, जन्मतिथि, पता और पहचान दस्तावेजों के आधार पर दो अलग-अलग व्यक्ति बिहार पुलिस में नौकरी करते रहे और बिना किसी रुकावट के दरोगा के पद से रिटायर भी हो गए. अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए राजेन्द्र सिंह के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं में केस दर्ज किया है.

Bihar Police, अनुज शर्मा, पटना: शिवहर जिले के पुलिस अधीक्षक की पहल पर की गई जांच में खुलासा हुआ कि विक्रमा सिंह नामक दो पुलिस अवर निरीक्षक, एक गया जिले से और दूसरा शिवहर से, एक जैसी व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर पुलिस सेवा में थे. दोनों की नियुक्ति, सेवा अवधि और सेवानिवृत्ति की तिथि 31 जनवरी 2023 थी.

कैसे पता चला फर्जीवाड़ा

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि शिवहर से सेवानिवृत्त हुआ व्यक्ति असल में कैमूर जिले के रामगढ़ निवासी राजेन्द्र सिंह है. उसने अपने फुफेरे भाई विक्रमा सिंह की पहचान और शैक्षणिक दस्तावेजों का उपयोग कर 12 मई 1982 को रोहतास जिला बल में सिपाही के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी. ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों से जुटाए गए बयान, साथ ही सेवा पुस्तिका और पैन कार्ड के विश्लेषण से पुष्टि हुई कि शिवहर से रिटायर हुआ व्यक्ति फर्जी है.

कई धाराओं में केस दर्ज

जांच टीम ने जुलाई 2023 में अपनी रिपोर्ट शिवहर एसपी को सौंप दी थी. अब आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने राजेन्द्र सिंह उर्फ फर्जी विक्रमा सिंह के खिलाफ कूट रचित दस्तावेज के आधार पर नौकरी हासिल करने सहित कई धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया.

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एक जैसा सबकुछ पाया गया

अपने फुफेरे भाई की पहचान चुराकर पुलिस की नौकरी हासिल करने के फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब वह व्यक्ति सेवानिवृत्त हो गया. इस पूरे प्रकरण की शुरुआत शिवहर के पुलिस अधीक्षक की एक पहल से हुई. 17 जून 2023 को उन्होंने वरीय पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) के नेतृत्व में एक चार सदस्यीय जांच टीम गठित की.

टीम को आदेश मिला कि शिवहर जिले से सेवानिवृत्त हुए पुलिस अवर निरीक्षक विक्रमा सिंह की नियुक्ति और पहचान से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच की जाए. जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. पता चला कि गया और शिवहर जिलों से सेवानिवृत्त हुए दो अलग-अलग पुलिस अवर निरीक्षक, जिनका नाम एक ही विक्रमा सिंह था, उनकी सेवा पुस्तिका में न केवल नाम समान था, बल्कि पिता का नाम, स्थायी पता, जन्मतिथि, पैन कार्ड नंबर, शारीरिक मापदंड (ऊंचाई और छाती की चौड़ाई) और सेवानिवृत्ति की तारीख भी एक जैसी दर्ज थी.

दोनों पुलिस अधिकारियों की सेवा समाप्ति की तारीख 31 जनवरी 2023 थी. उनके पिता का नाम स्वर्गीय रामचेला सिंह स्थायी पता मोहनिया, भभुआ, जन्मतिथि 7 जनवरी 1963, और पैन कार्ड नंबर भी एक ही था. जांच के निष्कर्ष में कहा गया कि शिवहर जिले से सेवानिवृत्त हुए पुलिस अवर निरीक्षक विक्रमा सिंह ने वास्तव में फर्जी तरीके से नौकरी हासिल की थी. उनका वास्तविक नाम राजेन्द्र सिंह है, और वे कैमूर जिले के रामगढ़ के निवासी हैं. उनके पिता का नाम ब्रह्मदेव सिंह है.

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12 मई 1982 को बना सिपाही

जांच में यह भी सामने आया कि राजेन्द्र सिंह ने अपने फुफेरे भाई विक्रमा सिंह के शैक्षणिक दस्तावेजों और पहचान का इस्तेमाल कर 12 मई 1982 को रोहतास जिला पुलिस बल में बतौर सिपाही योगदान दिया था. इसके बाद वे प्रमोशन पाकर पुलिस अवर निरीक्षक बने और 31 जनवरी 2023 को शिवहर से रिटायर हो गए. जांच टीम ने स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के बयान लिए और सेवा पुस्तिका के साथ-साथ शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का अवलोकन किया. तमाम सबूतों और गवाहियों के आधार पर टीम ने अपनी रिपोर्ट 14 जुलाई 2023 को शिवहर के एसपी को सौंप दी.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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