कौन हैं IAS दीपक कुमार मिश्रा? IIT से निकलकर बने ‘ब्यूरोक्रेसी के बॉस’, जिन पर सीएम नीतीश करते हैं आंख मूंदकर भरोसा

IAS Deepak Kumar Mishra: सीएम नीतीश कुमार ने एक बार फिर दीपक कुमार मिश्रा पर भरोसा जताया है. जानिए कौन हैं ये तेज-तर्रार आईएएस अधिकारी, इनकी शिक्षा, बैच और अब तक की उपलब्धियां.

By Abhinandan Pandey | January 9, 2026 9:03 PM

IAS Deepak Kumar Mishra: IAS दीपक कुमार मिश्रा बिहार के उन युवा अधिकारियों में शामिल हैं, जिनके काम की चर्चा हर स्तर पर होती है. वे 2019 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और फिलहाल बिहारशरीफ नगर निगम के नगर आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं. ईमानदार छवि, तेज फैसले और जनहित में काम करने की वजह से अब उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है.

सीवान से IIT दिल्ली तक का सफर

दीपक कुमार मिश्रा बिहार के सिवान जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने देश के बड़े संस्थान IIT दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा का लक्ष्य तय कर लिया था. साल 2018 में UPSC परीक्षा पास कर उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 511 हासिल की और IAS बने.

कॉर्पोरेट और रेलवे का अनुभव बना ताकत

आईएएस बनने से पहले दीपक मिश्रा ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) में सहायक प्रबंधक के रूप में काम किया. इसके साथ ही भारतीय रेलवे में भी सेवाएं दीं. इन अनुभवों ने उन्हें प्रबंधन, निर्णय क्षमता और जमीनी समस्याओं को समझने का मजबूत आधार दिया. जिसका फायदा उनके प्रशासनिक कार्यों में साफ दिखता है.

बिहारशरीफ में बदली प्रशासन की तस्वीर

नगर आयुक्त के रूप में बिहारशरीफ में उनके कार्यकाल के दौरान स्वच्छता, यातायात सुधार और नागरिक सुविधाओं पर खास ध्यान दिया गया. नगर निगम की वर्किंग सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ी और आम लोगों की समस्याओं का तुरंत समाधान शुरू हुआ. वर्षों से अधूरे पड़े फ्लाईओवर परियोजना को उन्होंने गंभीरता से लिया और तेजी से काम आगे बढ़ाया. जिससे शहरवासियों को जाम से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है.

अंतरराष्ट्रीय आयोजन से बढ़ा जिले का मान

दीपक मिश्रा की काम का बड़ा उदाहरण राजगीर खेल एकेडमी में आयोजित पुरुष हॉकी एशिया कप का सफल आयोजन रहा. सटीक योजना, दिन-रात की मेहनत और विभागों के बीच बेहतर तालमेल के कारण यह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता पूरी तरह सफल रही. इससे राजगीर और नालंदा जिले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली.

चुनावी जिम्मेदारियों में भी दिखी पकड़

विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें कई विभागों का नोडल अधिकारी बनाया गया. उनकी सक्रिय भूमिका के चलते चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुए और मतदान प्रतिशत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई.

पारदर्शिता और ईमानदारी की पहचान

बिहारशरीफ घंटाघर निर्माण से जुड़े मामले में सार्वजनिक जांच के दौरान भी उन्होंने तथ्यों और नियमों के आधार पर अपनी भूमिका स्पष्ट की. इस पूरे मामले में उनकी पारदर्शिता और प्रशासनिक ईमानदारी साफ नजर आई. मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव के रूप में नई जिम्मेदारी मिलना इस बात का संकेत है कि सरकार को उनकी क्षमता पर पूरा भरोसा है.

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