Bihta Nagar Parishad: सिकंदरपुर पंचायत को बिहटा नगर परिषद में शामिल करने के प्रस्ताव का ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जोरदार विरोध किया है. बुधवार को माछा स्वामी आश्रम में हुई बैठक में पंचायत को नगर परिषद में शामिल करने की प्रक्रिया के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी गयी. बैठक की अध्यक्षता मुखिया अग्रानंद पासवान ने की, जबकि नेतृत्व वर्तमान उपप्रमुख वरुण कुमार ने किया.
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि सिकंदरपुर पंचायत के आठ गांवों की बड़ी आबादी आज भी कृषि और कृषि मजदूरी पर निर्भर है. ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत की कार्यशील आबादी में 50 प्रतिशत से अधिक लोग कृषि अथवा काश्तकारी से जुड़े हैं. ऐसे में पंचायत को नगर निकाय में शामिल करना बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा-3 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है.
आठ गांवों में चलेगा हस्ताक्षर अभियान
ग्रामीणों ने कहा कि नगर परिषद में शामिल किये जाने से पंचायत के ग्रामीण स्वरूप और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रस्ताव के विरोध में पंचायत के सभी आठ गांवों में हस्ताक्षर अभियान चलाया जायेगा. ग्रामीणों ने कहा कि हस्ताक्षर अभियान के बाद भी यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया, तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जायेगा.
बीडीओ को सौंपा मांग पत्र
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस संबंध में बिहटा के बीडीओ को मांग पत्र सौंपा. इसमें सिकंदरपुर पंचायत को नगर परिषद विस्तार के प्रस्ताव से तत्काल बाहर रखने की मांग की गयी है.
आठ गांव होंगे प्रभावित
नगर परिषद में शामिल करने के प्रस्ताव से सिकंदरपुर पंचायत के डुमरी, सिकंदरपुर, रामनगर, किसुनपुर, बंदोली, मोहरमपुर, रायडीह और जमुनापुर गांव प्रभावित होंगे.
बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
बैठक में पूर्व उपप्रमुख कुशाल कुमार, पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि पवन कुमार, पंचायत समिति सदस्य शंकर जी, सरपंच, पंच, वार्ड सदस्य समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.
