पटना. अनुशासनहीनता पर एसएसपी ने बड़ी कार्रवाई की है. रानी तालाब थाना प्रभारी बिट्टू कुमार और उसी थाने के सिपाही संतोष कुमार को निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई सिटी एसपी (पश्चिमी) भानु प्रताप सिंह की अनुशंसा पर की गयी है. दोनों पुलिसकर्मियों पर कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, मनमानी और संदिग्ध आचरण जैसे गंभीर आरोप पाए गए हैं. जांच रिपोर्ट में इन आरोपों की पुष्टि के बाद एसएसपी ने दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. निलंबन के बाद दोनों को पटना पुलिस केंद्र भेज दिया गया है. सिपाही पर संदेह, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई सूत्रों के अनुसार सिपाही संतोष कुमार के खिलाफ पहले से गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही थीं. इस पर सिटी एसपी ने जांच कराई और थानेदार बिट्टू कुमार को निर्देश दिया कि संतोष कुमार को रानी तालाब थाना से विरमित किया जाये. लेकिन आदेश के बावजूद थानेदार ने सिपाही को न तो विरमित किया और न ही कहीं और भेजा, बल्कि उसे उसी थाने में तैनात रखा. सिटी एसपी के स्पष्ट निर्देश की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने एसएसपी को दोनों के खिलाफ निलंबन की अनुशंसा की. रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने कार्रवाई करते हुए दोनों को सस्पेंड कर दिया. नौबतपुर थानेदार पर कार्रवाई नहीं होने से सवाल इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल नौबतपुर थानेदार मंजीत ठाकुर को लेकर उठ रहा है. आरोप है कि उन्होंने पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार किया था, जिसकी शिकायत आईजी से लेकर पुलिस मुख्यालय तक की गई थी. मामले में डीजीपी ने भी जांच का आश्वासन दिया था. अनुशंसा के बावजूद लंबित कार्रवाई बताया जाता है कि सिटी एसपी ने जांच के बाद मंजीत ठाकुर पर कार्रवाई की अनुशंसा भी की थी. इसके बावजूद अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब रानी तालाब मामले में सिटी एसपी की अनुशंसा पर तुरंत कार्रवाई हो सकती है, तो नौबतपुर मामले में देरी क्यों. पद और रैंक को लेकर भी चर्चा नौबतपुर थाना प्रभारी का पद इंस्पेक्टर रैंक का है, जबकि मंजीत ठाकुर सब-इंस्पेक्टर हैं. इसके बावजूद वे उस पद पर तैनात हैं. इसको लेकर भी विभागीय व्यवस्था और कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं.
अनुशासनहीनता के आरोप में रानी तालाब थानेदार और सिपाही निलंबित
रानी तालाब थाना प्रभारी बिट्टू कुमार और उसी थाने के सिपाही संतोष कुमार निलंबित
