पटना में भी हुई थी महात्मा गांधी की प्रार्थना सभा, दरभंगा हाउस में हुई गोपनीय बैठक में हुए थे शामिल

Shahadat Diwas: राष्ट्र‌पिता महात्मा गांधी का बिहार से विशेष लगाव था. चंपारण आंदोलन से लेकर पटना के गांधी आश्रम तक बापू की कई यादे जुड़ी हैं. 1942 में पटना के गांधी मैदान में वे हर रोज प्रार्थना सभा करते थे. वे दरभंगा हाउस में हुई गोपनीय बैठक में भी भाग लिए थे.

Shahadat Diwas: राष्ट्र‌पिता महात्मा गांधी का बिहार से विशेष लगाव था. चंपारण आंदोलन से लेकर पटना के गांधी आश्रम तक बापू की कई यादे जुड़ी हैं. आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार हमें आगे बढ़ने और कुछ अच्छा करने की हमेशा प्रेरणा देते हैं. पटना में गांधी से जुड़ी कई स्मृतियां हैं. इन स्मृतियों में बापू टावर का नाम भी जुड़ गया है.

10 अप्रैल 1917 को गांधी जी पटना पहली बार आये थे. ये कोलकाता से रेलगाड़ी के तृतीय श्रेणी में बैठकर पटना पहुंचे थे. उस वक्त पटना जंक्शन को बांकीपुर जंक्शन के नाम से जाना जाता था. यह पहला मौका था, जब गांधी जी ने बिहार की धरती पर पहली बार कदम रखे थे. चंपारण सत्याग्रह, बिहार विद्यापीठ को स्थापना और आजादी की घोषणा के बाद बिहार में हुए दंगे आदि को लेकर बापू का लगातार पटना आना-जाना लगा रहा.

पंडित राजकुमार शुक्ल के साथ पहली बार पटना आये थे बापू

बिहार सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष चंद्र भूषण ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी व चंपारण के रहने वाले पं राजकुमार शुक्ल की जिद पर बापू पटना आये थे. गांधी के पटना आने का समाचार मालूम होने के बाद उनके पुराने मित्र मौलाना मजहरूल हक साहब अपनी मोटरगाड़ी से उन्हें फ्रिजर रोड स्थित अपने घर ‘सिकंदर मंजिल’ ले गये.

चंपारण सत्याग्रह बिहार विद्यापीठ की स्थापना व आजादी की घोषणा के बाद बिहार में हुए दंगे आदि को लेकर बापू का लगातार पटना आना-जाना लगा रहा. अंग्रेजों का रेसकोर्स कहा जाने वाला आजादी के पूर्व बांकीपुर लॉन को आज लोग गांधी मैदान के नाम से जानते हैं. लगभग 60 एकड़ में फैला मैदान अंग्रेजी हुकूमत में काफी वर्षों तक रेसकोर्स था. 1942 में बापू यहां हर रोज प्रार्थना सभा करते थे.

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दरभंगा हाउस में हुई थी बैठक

पटना में गांधीजी ने तीन जून 1917 को पीरबहोर के दरभंगा हाउस में एक गोपनीय बैठक में भाग लिया. बैठक में मौलाना मजहरूल हक, मदन मोहन मालवीय हबुआ के महाराज बहादुर राय बहादुर कृष्ण शाही, मोहम्मद मुसा युसुफ, राम गोपाल चौधरी, एक्सप्रेस के प्रबंधक कृष्णा प्रसाद, दरभंगा महाराज के आप्त सचिव बैठक में थे. वे सात जून 1917 को रांधी से पटना लौटे थे.

मजहरूल हक से मिले थे गांधी जी

तीसरी बार पटना एक दिसंबर 1920 को आये थे. इस दौरान वे सदाकत आश्रम में मौलाना मजहरूल हक के साथ आश्रम में रहे फिर इसी सात दो दिसंबर को फुलवारीशरीफ गये और फिर तीन दिसबर को आश्रम में रहे थे.

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लेखक के बारे में

अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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