Samrat Choudhary : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की राह पर चलते नजर आ रहे हैं. जी हां, हम ये बात यूं ही नहीं कह रहे. दरअसल, आज एक कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसा हुआ ही. सम्राट चौधरी ने मुस्लिम टोपी पहनने से इंकार कर दिया. टोपी पहनाने वाले शक्स का हाथ पकड़ लिए और अपने तल्ख तेवर भी दिखा दिए.
‘टोपी’ से ज्यादा संदेश पर चर्चा
टोपी पहनाने के दौरान एक बात और गौर करने वाली थी. वो थे उनके चेहरे के भाव. BJP के नए मुखिया ने इस दौरान अपने चेहरे के भाव से भी यह बता दिया कि उन्हें यह ‘एक्सपेरीमेंट’ पसंद नहीं आया. सम्राट के चेहरे के भाव को समझने के लिए हम खबर के साथ वीडियो भी अपलोड कर देंगे. जानकार मानते हैं कि यह जानते हुए भी मौजूदा मुखिया भारतीय जनता पार्टी का है. एक वर्ग बार-बार इस तरह के प्रयोग करने से बाज नहीं आता है.
BJP स्टाइल Politics Model?
हालांकि सम्राट चौधरी ने मुस्लिम टोपी पहनाने वाले शक्स का कोई अपमान नहीं किया. लेकिन अपने शपथ ग्रहण के 48 घंटे के दौरान ही यह बता दिया कि बिहार की राजनीति किस ओर जाने वाली है. उन्होंने बिहार में बीजेपी पॉलिटिक्स मॉडल की नींव रख दी है. बिहार की राजनीति के जानकार रमाकांत चंदन का मानना है कि सम्राट चौधरी ने कुछ भी गलत नहीं किया और न ही कुछ अलग किया है. ये बीजेपी मॉडल है. जिसे सम्राट ने स्थापित किया है. चंदन कहते हैं ‘जो सम्राट चौधरी ने किया वो न केवल बिहार में बीजेपी मॉडल के लिए जरूर है बल्कि सम्राट चौधरी के लिए भी उतना ही जरूरी है.’
संघ को भी संदेश
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रमाकांत चंदन कहते हैं कि सम्राट चौधरी ने टोपी न पहनकर जो संदेश दिया, वो केवल बिहार की जनता के लिए नहीं है. असल में ये संदेश आरएसएस के लिए भी है. उन्होंने इस एक्शन से ये साफ कर दिया है कि भले ही ‘मैं RSS का स्वयंसेवक नहीं हूं लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और बीजेपी की विचारधारा को पूरी तरह से मानता हूं.’
क्राइसिस में मजबूत विकल्प
बिहार बीजेपी में एक धड़ा ऐसा भी है जो सम्राट के खिलाफ है. आरएसएस भी अपने स्कूल से निकले लोगों को बिहार का मुख्यमंत्री बनता देखना चाहता था. वहीं, बीजेपी का एक धड़ा पुराने कार्यकर्ता और विचारधार में पले बड़े पुराने कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री का ताज देना चाहता था. लेकिन लगभग दो महीनों तक चले जबरदस्त एक्सरसाइज के बाद भी फैसला सम्राट के पक्ष में गया. आज जिस तरह से सम्राट चौधरी ने मुस्लिम टोपी पहनने से इन्कार किया, उसने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह पार्टी और विचारधारा (RSS Ideology) दोनों के लिए मजबूत और भरोसेमंद विकल्प हैं.
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