प्रभात खबर के पत्रकार का फोन छीना, सबूत मिटाए, गालियां दीं, पटना जंक्शन पर RPF जवानों ने दी जेल भेजने की धमकी

Patna Junction: पटना जंक्शन पर यात्रियों की परेशानी दिखाने गए प्रभात खबर के पत्रकारों के साथ बदतमीजी की गई है. कवरेज के दौरान आरपीएफ जवानों ने मोबाईल छीनने का प्रयास किया. थाने में एक घंटे तक बैठाया. जेल भेजने की भी धमकी दी.

By Abhinandan Pandey | January 11, 2026 9:58 PM

Patna Junction: ट्रेन लेट होने से जूझ रहे यात्रियों की परेशानी दिखाने प्रभात खबर के दो पत्रकार रविवार को पटना जंक्शन पहुंचे थे. जिनके साथ आरपीएफ जवानों ने बदतमीजी की है. कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ न सिर्फ बहस और धक्का-मुक्की की गई, बल्कि उनका मोबाइल फोन छीनकर सबूत मिटाने की भी कोशिश हुई.

कोहरे के कारण घंटों लेट चल रही ट्रेनों में फंसे यात्रियों की परेशानी को दिखाने के लिए पत्रकार पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर मौजूद थे. इसी दौरान दिल्ली-कामाख्या ब्रह्मपुत्र मेल स्टेशन पर पहुंची. पत्रकारों ने ट्रेन से उतरे यात्रियों से उनकी परेशानी को लेकर बातचीत शुरू की और वीडियो रिकॉर्ड किया.

मोबाइल छीनने का किया गया प्रयास

इसी बीच आरपीएफ के कई जवान मौके पर पहुंचे और पत्रकारों से उलझने लगे. फिर बिना किसी ठोस वजह के वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश की गई. मोबाइल फोन छीनने का प्रयास किया गया. पत्रकारों का कहना है कि वे केवल यात्रियों की परेशानी दिखा रहे थे, न कि रेलवे के खिलाफ कोई कमेंट कर रहे थे.

इतना ही नहीं, मौके पर एक बुजुर्ग महिला स्लीपर कोच में चढ़ने के लिए मदद मांग रही थी, लेकिन जवानों ने उसकी सहायता करने के बजाय पत्रकारों से बहस जारी रखी. इसके बाद पत्रकारों को जबरन आरपीएफ थाना ले जाया गया, जहां उन्हें करीब 45 मिनट से एक घंटे तक बैठाकर रखा गया.

थाने में गाली-गलौज, जवान ने दी धमकी

पत्रकारों ने बताया कि थाने में उनके साथ लगातार बदतमीजी की गई. उन्हें गाली-गलौज का सामना करना पड़ा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. बार-बार पूछने पर भी यह नहीं बताया गया कि उनकी गलती क्या है. पहचान पत्र दिखाने के बावजूद आरपीएफ जवान उनका मजाक उड़ाते रहे और जेल भेजने की धमकी देते रहे.

वहीं हाथ में खाने की टिफिन लिए एक आरपीएफ जवान ने कहा कि तुम्हारी कोई औकात नहीं है. मेरी औकात देखनी है तो वर्दी उतारने के बाद शाम 4 बजे के बाद मिलो. इस दौरान पत्रकार यह समझाने की कोशिश करते रहे कि वीडियो में रेलवे के खिलाफ कोई नकारात्मक बात नहीं है, बल्कि यात्रियों की वास्तविक परेशानी को ही दिखाया जा रहा है.

जब प्रमोशन के लिए बुलाया जाता है, तो सवाल उठाने पर आपत्ति क्यों?

पत्रकारों ने सवाल उठाया है कि जब रेलवे बोर्ड के निर्देश पर वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के उद्घाटन और प्रचार के लिए मीडिया को बाकायदा आमंत्रण भेजा जाता है. स्टेशन पर कवरेज कराया जाता है और रील-वीडियो बनाने की अनुमति दी जाती है. तो फिर यात्रियों की समस्या दिखाने पर इस तरह का व्यवहार क्यों किया जाता है? जिन पत्रकारों के साथ बदतमीजी हुई, वे पहले भी रेलवे के साथ कई प्रमोशनल यात्राओं का हिस्सा रह चुके हैं.

आरपीएफ इंस्पेक्टर बोले- मुझे कोई जानकारी नहीं

पटना जंक्शन आरपीएफ इंस्पेक्टर अजय शंकर पटेल से जब फोन पर इस घटना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है. उन्होंने यह जरूर कहा कि जानकारी मिलने के बाद मामले की जांच कराई जाएगी.

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