Prashant Kishor: बांकीपुर से चुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर ने इलाके के बेरोजगार युवाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि बांकीपुर के पढ़े-लिखे बेरोजगार बच्चों को नौकरी दिलाने की कोशिश की जाएगी. इसके लिए उन्होंने लोगों से अपने बच्चों का बायोडाटा और सीवी उनके ऑफिस में जमा करने को कहा है.
10 हजार बच्चों को नौकरी दिलाने की कोशिश
प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर किसी का बच्चा पढ़ा-लिखा है और नौकरी की तलाश कर रहा है तो उसका सीवी और बायोडाटा उनके ऑफिस में जमा करें. उन्होंने कहा कि कम से कम 10 हजार बच्चों को नौकरी दिलाने की व्यवस्था करने की कोशिश की जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि सरकारी नौकरी का वादा नहीं किया जा रहा है. उनकी कोशिश बड़े निजी कंपनियों और अपने संपर्क में मौजूद लोगों के जरिए युवाओं को प्राइवेट नौकरी दिलाने की होगी.
पीके बोले- आपका ही काम कर रहे हैं, कहीं घूम नहीं रहे
प्रशांत किशोर ने उन लोगों को भी जवाब दिया, जो उनकी जीत के बाद उनके इलाके में नहीं दिखने को लेकर सवाल उठा रहे थे. उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि जीत के 5-7 दिन बाद से वह कहां घूम रहे हैं. प्रशांत किशोर ने कहा कि वह कहीं घूम नहीं रहे हैं, बल्कि लोगों का ही काम कर रहे हैं और इसी काम की घोषणा करने के लिए यहां आए हैं.
प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर से पढ़े-लिखे जो बच्चे नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने की कोशिश की जाएगी. उन्होंने कहा कि बिहार के किसी भी विधानसभा क्षेत्र की तुलना में अगर सबसे ज्यादा बच्चों को नौकरी मिलेगी तो वह बांकीपुर से मिलेगी. इसके लिए उनकी टीम और उनके संपर्क में रहने वाले बड़े लोगों की मदद ली जाएगी.
सरकारी नौकरी का नहीं किया वादा
प्रशांत किशोर ने युवाओं को लेकर अपनी योजना के बारे में साफ किया कि वह सरकारी नौकरी देने का वादा नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी दिलाना उनके हाथ में नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि बेरोजगार बच्चों को ऐसी प्राइवेट नौकरी मिले, जिससे वे अपने जीवन का खर्च चला सकें और सम्मान के साथ कमाई कर सकें.
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पीके ने कहा- 'जिन लोगों ने फायदा उठाया, उनसे भी मदद मांगी'
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि अब तक जितने लोगों ने उनसे किसी न किसी तरह फायदा उठाया है, उन सभी से उन्होंने बांकीपुर के बच्चों को नौकरी दिलाने में मदद करने को कहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि जिनके बच्चे पढ़े-लिखे हैं और अभी नौकरी की तलाश में हैं, वे उनका बायोडाटा और सीवी लेकर उनके ऑफिस पहुंचें. इसके जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ने की कोशिश की जाएगी.
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