Railway Track Safety Wall : पटना रेलखंड पर यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों की रफ्तार को बेहतर बनाने के लिए रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है. सचिवालय हॉल्ट से कोइलवर तक रेलवे ट्रैक के दोनों ओर सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी. 8 से 10 फीट ऊंची इस दीवार का उद्देश्य ट्रैक पर इंसानों और पशुओं के अनधिकृत प्रवेश को रोकना है. इसके लिए रेलवे ने 3.85 करोड़ रुपये की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है.
सचिवालय हॉल्ट से कोइलवर तक बनेगी दीवार
रेलवे ट्रैक के दोनों ओर सुरक्षा दीवार का निर्माण सचिवालय हॉल्ट से शुरू होकर दानापुर और बिहटा होते हुए कोइलवर तक चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. रेलवे की योजना के मुताबिक दीवार की ऊंचाई करीब 8 से 10 फीट होगी, जिससे आम लोगों और पशुओं के लिए ट्रैक तक पहुंचना मुश्किल होगा.
3.85 करोड़ रुपये की टेंडर प्रक्रिया पूरी
इस काम के लिए रेलवे की ओर से 3.85 करोड़ रुपये की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है. पूर्व मध्य रेलवे के निर्देश पर दानापुर मंडल ने ट्रैक के दोनों ओर सुरक्षा दीवार बनाने का निर्णय लिया है. निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा.
पशुओं के ट्रैक पर आने से ट्रेन रोकने की जरूरत घटेगी
रेलवे ट्रैक पर पशुओं के अचानक आ जाने से कई बार ट्रेनों को रोकना पड़ता है. लोको पायलट की नजर पड़ने पर ट्रेन को रोककर रेलकर्मियों की मदद से पशु को ट्रैक से हटाया जाता है. इससे ट्रेन परिचालन प्रभावित होने के साथ समय की भी बर्बादी होती है. सुरक्षा दीवार बनने के बाद ऐसी घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है.
आवासीय इलाकों और खेतों के पास ज्यादा खतरा
कई स्थानों पर रेलवे लाइन आवासीय इलाकों और खेतों के बीच से गुजरती है. ऐसे क्षेत्रों में लोग शॉर्टकट के लिए ट्रैक पार करते हैं या पटरी के किनारे चलते हैं. पशु भी खुले रास्ते से रेलवे लाइन तक पहुंच जाते हैं. इससे हादसे का खतरा बना रहता है.
ट्रैक पार करने के दौरान हो चुके हैं हादसे
रेलवे ट्रैक पार करने या उसके आसपास अनधिकृत रूप से जाने के दौरान कई लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं. हाल ही में दानापुर के पास ट्रेन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत की घटना सामने आयी थी. इसके अलावा पंडारक और सचिवालय हॉल्ट के पास भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं.
वंदे भारत के सामने भी आ चुके हैं पशु
तेज गति से चलने वाली वंदे भारत ट्रेनों के सामने भी कई बार पशुओं के ट्रैक पर आ जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. ट्रायल के दौरान भी ऐसे मामले सामने आए थे. पटना-रांची वंदे भारत ट्रेन के सामने बरकाकाना के समीप एक आवारा पशु आ गया था, जिसके कारण ट्रेन करीब आधे घंटे तक जंगल के बीच रुकी रही थी.
पशु हटाने के बाद आगे बढ़ी थी ट्रेन
बरकाकाना के समीप ट्रैक पर पशु आने के बाद रेलकर्मियों ने उसे हटाया. इसके बाद ट्रेन को आगे रवाना किया गया. इस तरह की घटनाओं में यात्रियों की सुरक्षा के साथ ट्रेन के परिचालन पर भी असर पड़ता है. रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसे जोखिम को कम करना है.
ट्रैक पर आम लोगों का अनधिकृत प्रवेश होगा बंद
सुरक्षा दीवार बनाने का एक बड़ा उद्देश्य रेलवे ट्रैक पर आम लोगों के अनधिकृत प्रवेश को रोकना है. इसके साथ ही रेलवे की जमीन को अतिक्रमण से बचाने और ट्रैक के आसपास होने वाले हादसों को कम करने में भी यह दीवार मददगार होगी.
ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा पर पड़ेगा असर
रेलवे के इस कदम से ट्रैक पर इंसानों और पशुओं के अचानक आने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है. इससे अनावश्यक रूप से ट्रेन रोकने की जरूरत कम हो सकती है और ट्रेन परिचालन अधिक सुरक्षित एवं सुचारु बनाने में मदद मिलेगी.
ट्रैक सुरक्षा को मजबूत करने में मिलेगी मदद
अब टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा. सचिवालय हॉल्ट से दानापुर, बिहटा होते हुए कोइलवर तक बनने वाली सुरक्षा दीवार से इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर ट्रैक सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
