Patna News: (हिमांशु देव की रिपोर्ट)
पटना. ग्लोबल डे ऑफ पेरेंट्स के अवसर पर बच्चों की सफलता में माता-पिता की भूमिका को लेकर भावनात्मक कहानियां सामने आई हैं. पढ़ाई, खेल और करियर की हर उपलब्धि के पीछे वर्षों का संघर्ष, त्याग और निस्वार्थ प्रेम छिपा होता है, जिसे अक्सर सिर्फ अंतिम परिणाम के रूप में देखा जाता है. लेकिन असली नींव घर के माहौल और अभिभावकों के अटूट विश्वास से तैयार होती है.
सफलता के पीछे छिपा माता-पिता का संघर्ष और त्याग
बच्चों की हर कामयाबी के पीछे माता-पिता का सालों का समर्पण होता है। वे अपनी इच्छाओं को पीछे छोड़कर बच्चों के सपनों को पूरा करने में लगे रहते हैं. विशेषज्ञों और छात्रों के अनुसार, मजबूत पारिवारिक समर्थन ही किसी भी सफलता की सबसे बड़ी आधारशिला है.
सिद्धि झा की सफलता के पीछे परिवार का योगदान
दरभंगा की सिद्धि झा ने बिहार बोर्ड 12वीं में विज्ञान संकाय से 95 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिले में टॉप किया है. सिद्धि ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और बड़ी बहन को दिया है, जो खुद एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं और उन्होंने अभिभावक की भूमिका निभाई.
संघर्ष से सफलता तक का सफर बना प्रेरणा
सिद्धि बताती हैं कि उनकी मां ने अपनी इच्छाओं को त्यागकर दोनों बेटियों को मजबूत बनाया, जबकि पिता ने सीमित संसाधनों में भी उन्हें बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल दिया. आज सिद्धि नीट की तैयारी कर रही हैं.
अनुष्का अमर को मिला परिवार का मजबूत साथ
कॉमर्स स्ट्रीम की छात्रा अनुष्का अमर ने 12वीं में 92 प्रतिशत अंक हासिल कर सफलता प्राप्त की है. उनके पिता सिविल इंजीनियर और मां हिंदी में एमए हैं, जिन्होंने शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी और हर परिस्थिति में उनका साथ दिया.
IITian बहन बनी सबसे बड़ी प्रेरणा
अनुष्का की बड़ी बहन, जो एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज में कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हैं और आईआईटी पासआउट हैं, ने पढ़ाई से लेकर समय प्रबंधन तक हर कदम पर मार्गदर्शन दिया. परिवार के सहयोग से अनुष्का की सफलता और मजबूत हुई.
कात्यायनी सिंह का सपना और माता-पिता का संबल
16 वर्षीय नेशनल स्विमर कात्यायनी सिंह पिछले दो वर्षों से बेंगलुरु में रहकर ट्रेनिंग कर रही हैं. उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने उनके खेल करियर के लिए कई त्याग किए और हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
‘कर्म करो, फल की चिंता मत करो’ से मिला आत्मविश्वास
कात्यायनी के पिता उन्हें गीता के संदेश के अनुसार कर्म पर ध्यान देने की सीख देते हैं, जबकि उनकी मां हर मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाती हैं. कात्यायनी का लक्ष्य देश के लिए बेहतरीन स्विमर बनना है.
माता-पिता ही हैं असली ताकत और सफलता की नींव
इन कहानियों से साफ है कि हर बच्चे की सफलता के पीछे माता-पिता का त्याग, प्रेम और समर्थन सबसे बड़ी शक्ति है. ग्लोबल पेरेंट्स डे पर यह संदेश और भी मजबूत हो जाता है कि असली हीरो घर के भीतर ही होते हैं.
