पटना: कारगिल के रणबांकुरे नायक गणेश यादव की वीरगाथा, 27 साल बाद भी विकास की राह देख रहा गांव

कारगिल विजय दिवस पर देश नायक गणेश प्रसाद यादव को नमन कर रहा है, जिन्होंने बटालिक सेक्टर में अदम्य साहस दिखाया. 27 साल बाद भी उनका पैतृक गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित है, जहाँ वादे आज भी अधूरे हैं.

कारगिल विजय दिवस पर पूरा देश अपने वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है. इन्हीं अमर वीरों में पटना जिले के बिहटा प्रखंड के पांडेयचक गांव निवासी नायक गणेश प्रसाद यादव का नाम गर्व के साथ लिया जाता है. 29 मई 1999 को कारगिल के बटालिक सेक्टर में उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए. उनकी शहादत के 27 वर्ष बाद भी उनकी वीरता की गाथा लोगों को प्रेरित करती है. हालांकि, जिस गांव ने देश को ऐसा वीर सपूत दिया, वह आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है.

घायल साथी को बचाने के लिए दुश्मनों पर टूट पड़े थे गणेश यादव

शहीद की पत्नी पुष्पा देवी बताती हैं कि युद्ध शुरू होने से पहले गणेश यादव एक महीने की छुट्टी पर घर आए थे. छुट्टी पूरी होने से पहले ही उन्हें यूनिट से तत्काल वापस बुला लिया गया. उन्होंने परिवार से सिर्फ इतना कहा कि जरूरी ड्यूटी पर जाना है.

कारगिल युद्ध के दौरान बटालिक सेक्टर में भीषण गोलीबारी के बीच उनके एक साथी जवान को दुश्मन की गोली लग गई. साथी को घायल देख गणेश यादव बिना अपनी जान की परवाह किए दुश्मनों पर टूट पड़े. इस दौरान उन्हें भी गोली लगी, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने उस दुश्मन सैनिक को मार गिराया जिसने उनके साथी को गोली मारी थी. इसके बाद उन्होंने वीरगति प्राप्त की.

बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश सेवा का था सपना

30 जनवरी 1971 को पांडेयचक गांव में रामदेव यादव और बचिया देवी के घर जन्मे गणेश यादव बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहते थे. मैट्रिक की परीक्षा के बाद उनका चयन बिहार रेजिमेंट में हुआ. वर्ष 1994 में उनकी शादी पुष्पा देवी से हुई. उनके पुत्र अभिषेक ने सैनिक स्कूल से शिक्षा प्राप्त कर बीकॉम की पढ़ाई पूरी की, जबकि पुत्री ज्योति फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रही हैं.

घोषणाएं हुईं, लेकिन गांव का विकास अधूरा रह गया

शहादत के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव स्वयं पांडेयचक गांव पहुंचे थे. उस समय शहीद परिवार को आर्थिक सहायता, गैस एजेंसी, गांव तक पक्की सड़क, प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन, आवास और बिजली जैसी कई सुविधाएं देने की घोषणा की गई थी.

समय बीतने के बावजूद अधिकांश घोषणाएं आज भी अधूरी हैं. गांव में विद्यालय भवन तो बना, लेकिन नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अब तक नहीं बन पाया. अधूरा सामुदायिक भवन उपयोग के अभाव में जर्जर हो रहा है और गांव तक जाने वाली सड़क भी कई स्थानों पर खराब स्थिति में है.

कारगिल दिवस पर श्रद्धांजलि, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल कारगिल विजय दिवस पर जनप्रतिनिधि और अधिकारी शहीद को श्रद्धांजलि देने आते हैं, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद गांव की समस्याएं फिर भुला दी जाती हैं. ग्रामीण वर्षों से स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति, स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना, सामुदायिक भवन पूरा कराने और सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं.

मां बोलीं, शहीद का सम्मान विकास कार्यों से हो

शहीद गणेश यादव की वृद्ध मां बचिया देवी कहती हैं कि बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है, लेकिन सरकारों द्वारा किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए. उनका कहना है कि शहीदों का सम्मान केवल माल्यार्पण और भाषणों तक सीमित नहीं होना चाहिए. यदि गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं, तो वही उनके बेटे के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

ग्रामीणों ने सरकार से की लंबित घोषणाएं पूरी करने की मांग

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पांडेयचक के ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि शहीद गणेश यादव के नाम पर की गई सभी लंबित घोषणाओं को जल्द पूरा किया जाए. गांव के विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना, अधूरे सामुदायिक भवन का निर्माण, सड़क की मरम्मत और शहीद परिवार के वृद्ध सदस्यों को सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.


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By Monu Kumar Mishra

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