Patna Dog Show: राजधानी के बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के परिसर में रविवार को आयोजित डॉग शो में पेट लवर्स का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. इस श्वान प्रदर्शनी में 80 से अधिक अलग-अलग नस्लों के डॉग्स ने हिस्सा लिया. प्रतियोगिता में अनुशासन और खूबसूरती का अनोखा मेल देखने को मिला, लेकिन आकर्षण का केंद्र बना बोरिंग रोड के अभिषेक कुमार सिंह का डॉग ‘काली’. रूस से विशेष रूप से मंगवाई गई सेंट्रल एशियन शेफर्ड (अलाबाई) नस्ल की इस मादा डॉग ने अपनी शानदार कद-काठी और व्यवहार से जजों का दिल जीत लिया और ओवरऑल चैंपियन का खिताब अपने नाम किया.
इस चैंपियन डॉग की खूबियां और इसकी शाही जीवनशैली सुनकर हर कोई दंग रह गया. इसके मालिक विक्की ने बताया कि उनके पिता अभिषेक सिंह ने इसे रूस से मंगाने में लगभग सात लाख रुपये खर्च हुए.अलाबाई नस्ल दुनिया की सबसे ताकतवर ब्रीड्स में से एक मानी जाती है, जिसका बाइट फोर्स शेर से भी अधिक होता है. काली की देखभाल का खर्च भी किसी लग्जरी लाइफस्टाइल से कम नहीं है. इसकी डाइट में रोजाना करीब दो किलो चिकन और डेढ़ किलो मटन शामिल होता है, जिसके चलते इसकी मासिक देखभाल पर 50 हजार रुपये से अधिक का खर्च आता है. विक्की बताते हैं कि यह जितनी खतरनाक दिखती है, अपने मालिक के प्रति उतनी ही वफादार और सुरक्षात्मक भी है. एक बार इसने उन्हें स्ट्रीट डॉग्स के हमले से भी बचाया था. डॉग शो में आए मालिकों और उनके बेजुबान दोस्तों की कहानियां दिल छू लेने वाली थीं. पेश है इसकी खास रिपोर्ट.
शाहरुख खान के घर से है जो-जो का नाता
कंकड़बाग की विमला सिंह अपने खास चिहुआहुआ ब्रीड के डॉग जो-जो के साथ आईं थी. विमला ने एक दिलचस्प बात साझा की कि जो-जो के माता-पिता टाको और जीजी अभिनेता शाहरुख खान (Shahrukh Khan) के घर पर हैं. चूंकि शाहरुख की पत्नी गौरी खान उनकी रिश्तेदार हैं, इसलिए उन्हें यह खास डॉग उपहार स्वरूप मिला. पटना में इस ब्रीड के मेल डॉग कम होने के कारण उन्होंने इसका ऑपरेशन करा दिया है. जो-जो काफी फुर्तीला है और बहुत तेज दौड़ताहै. खाने में इसे रोटी और चिकन बेहद पसंद है.
IPS विक्रम सिहाग का मर्फी है परिवार का अभिन्न हिस्सा
वैशाली के एसपी विक्रम सिहाग अपनी पत्नी गरिमा के साथ डॉग शो में शामिल हुए. उनके पास शिट्ज़ू ब्रीड का डॉग है, जिसका नाम मर्फीहै. तीन वर्षीय मर्फी सिहाग परिवार के लिए एक पालतू जानवर नहीं बल्कि घर के सदस्य जैसा है. विक्रम बताते हैं कि मर्फी की खुशी से ही पूरे घर में रौनक रहती है. वहीं गरिमा ने बताया कि मर्फी इंसानी भावनाओं को बहुत जल्दी भांप लेता है, जिससे कभी अकेलापन महसूस नहीं होता.मर्फी को खान-पान में दही-रोटी, अंडा और फल बहुत पसंद हैं. फलों में वह बड़े चाव से पपीता और अनार खाता है. विक्रम 2020 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं.
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हंटर के इलाज में कुर्बान किए चार लाख रुपए
पाटलिपुत्र के रहने वाले नीता और आरके झा की कहानी संघर्ष और अटूट प्रेम की है. वे अपने 3 साल के हस्की हंटर को लेकर शो में आए थे. उन्होंने हंटर को तब खरीदा था जब वह महज एक महीने का था. लेकिन 8 महीने की उम्र में हंटर का पूरा शरीर पैरालाइज हो गया. लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और डॉक्टर राकेश की देखरेख में उसका लंबा इलाज कराया. उन्होंने बताया कि अब तक हंटर के इलाज पर वे 4 लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुके हैं. आज हंटर ठीक है और अपनी आकर्षक आंखों से सबका दिल जीत रहा है. उनके लिए हंटर की पहचान उनके अपने बच्चे जैसी है.
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चम्मच से खाना खाता है अभिलाषा का कोको
मुंगेर की रहने वाली अभिलाषा अपने पोमेरेनियन कोको के साथ शो में पहुंची. कोको के साथ उनकी कहानी लॉकडाउन के दौरान शुरू हुई थी, जब वे पटना में अकेली थीं और उनके एक दोस्त ने कोको को ऑनलाइन भेजा था. अभिलाषा कहती हैं कि कोको मेरे बेटे की तरह है. कोको के खाने के नखरे बिल्कुल छोटे बच्चों जैसे हैं. वह खाने के लिए काफी ड्रामा करता है, इसलिए अभिलाषा उसे हमेशा कटोरी और चम्मच से खिलाती हैं. कोको को वेज बिरयानी बहुत पसंद है, खासकर तब जब उसमें बीन्स, गाजर और सेब मिक्स हो.
लुधियाना से आया एंजो प्रथम की पसंद
बोरिंग रोड के निवासी प्रथम सराफ का पशु प्रेम बचपन से ही गहरा है. आठवीं कक्षा से ही उन्होंने पालतू जानवरों को रखना शुरू कर दिया था. आज उनके घर में कुत्तों और बिल्लियों के अलावा कई तरह की चिड़ियां भी हैं. उनके पास हस्की, पोमेरेनियन और चाव-चाव जैसी बेहतरीन नस्लों के डॉग हैं. डॉग शो में वे अपने चाव-चाव नस्ल के डॉग एंजो को लेकर पहुंचे. 13 महीने का एंजो दिखने में बिल्कुल किसी प्यारे टेडी बियर जैसा है. प्रथम ने बताया कि वे इसे लुधियाना से लाए हैं और इसका वजन 25 किलो है. यह स्वभाव से बेहद मिलनसार है और अपनी खूबसूरती के कारण शो में आकर्षण का केंद्र बना रहा.
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