दानापुर नगर परिषद में जलाशय पर बढ़ता अतिक्रमण बना मुसीबत, जल निकासी व्यवस्था ठप होने से किसान और ग्रामीण परेशान

Patna News: दानापुर नगर परिषद क्षेत्र के शाहपुर स्थित जलाशय पर बढ़ते अतिक्रमण और वर्षों से सफाई नहीं होने के कारण जलनिकासी व्यवस्था चरमरा गई है. इसका खामियाजा स्थानीय लोगों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है. जलभराव के कारण खेतों में खेती प्रभावित हो रही है, जबकि बारिश के दिनों में आसपास के मोहल्लों में भी जलजमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है.

Patna News: (संजय कुमार की रिपोर्ट)
राजधानी पटना से सटे दानापुर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-5 स्थित शाहपुर बैक रोड के सामने मौजूद जलाशय अतिक्रमण और उपेक्षा का शिकार हो गया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलाशय की भूमि पर अवैध कब्जा कर पक्के मकानों का निर्माण करा लिया गया है, जिससे जलाशय का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है. वहीं वर्षों से सफाई और उड़ाही नहीं होने के कारण जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है.

अतिक्रमण से सिमटा जलाशय, बढ़ी जलजमाव की समस्या

स्थानीय निवासी कामेश्वर सिंह ने बताया कि शाहपुर बैक रोड के नाले का पानी इसी जलाशय में गिरता है. पहले यह जलाशय काफी गहरा और विस्तृत था तथा सालभर पानी भरा रहता था. लेकिन लगातार अतिक्रमण और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इसकी स्थिति बदतर हो गई है. उन्होंने कहा कि नगर परिषद द्वारा अब तक जलाशय की समुचित सफाई नहीं कराई गई, जिससे बारिश के दिनों में पूरे इलाके में जलजमाव की स्थिति बन जाती है.

25 बीघा कृषि भूमि प्रभावित

ग्रामीणों के अनुसार जलभराव के कारण करीब 25 बीघा कृषि भूमि प्रभावित रहती है. खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. कई किसानों की जमीन पर नियमित रूप से फसल तक नहीं लग पाती.

जलनिकासी के लिए नहीं बना नाला

समाजसेवी विकास कुमार ने आरोप लगाया कि जलाशय की जमीन पर दबंगों ने अतिक्रमण कर पक्के मकान बना लिए हैं. साथ ही नगर परिषद की ओर से जलनिकासी के लिए नाले का निर्माण भी नहीं कराया गया है. उन्होंने बताया कि कभी यह जलाशय तीन बीघा से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ था.

घरों तक पहुंच गया था पानी

स्थानीय निवासी साजन सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष जलजमाव की स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उनके घर में घुटने तक पानी भर गया था. उन्होंने जलाशय की सफाई कराने, उसे नहर से जोड़ने और स्थायी जलनिकासी व्यवस्था के लिए नाला निर्माण कराने की मांग की.

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला

स्थानीय लोगों का कहना है कि जलाशयों और तालाबों की भूमि पर अतिक्रमण करना गंभीर मामला है. सर्वोच्च न्यायालय भी स्पष्ट कर चुका है कि जलाशयों की भूमि का अन्य उपयोग नहीं किया जा सकता और इन्हें अतिक्रमण से मुक्त कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है. लोगों का आरोप है कि मुख्य पार्षद, वार्ड पार्षद और नगर परिषद अधिकारियों को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

नाला निर्माण की प्रक्रिया शुरू

पूर्व पार्षद प्रतिनिधि मनोज मास्टर ने बताया कि जलनिकासी के लिए करीब सवा करोड़ रुपये की लागत से आरसीसी नाला निर्माण की योजना तैयार की गई है. इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है और विभागीय स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा.

वहीं नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सह प्रशासक ने कहा कि जलनिकासी के लिए प्रस्तावित नाला निर्माण योजना की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. साथ ही जलाशय की अतिक्रमित भूमि को भी अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया जाएगा.

जांच के बाद होगी कार्रवाई

एसडीओ ने कहा कि मामले की जानकारी लेकर नगर परिषद प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा. अतिक्रमण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

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