NEET UG Paper Leak: दिल्ली से भूटान तक हो रही है संजीव मुखिया की तलाश, EOU के पास कोई सुराग नहीं, CBI से मांगी मदद

NEET UG Paper Leak: वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, संजीव मुखिया के नेपाल या भूटान में छिपे होने की संभावना है, जिसके चलते केंद्रीय एजेंसियों पर निर्भरता बढ़ गयी है. EOU ने बिहार और अन्य राज्यों में भी लगातार छापेमारी की है, लेकिन हर बार वह हाथ से फिसल गया. 4 मार्च को नालंदा जिले के नगरनौसा थाना क्षेत्र स्थित उसके पैतृक गांव शाहपुर बलबा में उसके घर पर इश्तेहार भी चिपकाया जा चुका है.

NEET UG Paper Leak, संवाददाता, पटना: नीट-यूजी पेपर लीक मामले का मास्टरमाइंड संजीव मुखिया अब भी फरार है. इनाम की घोषणा को चार दिन गुजर चुके हैं, लेकिन आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) को अब तक कोई ऐसा सुराग हाथ नहीं लगा है, जिससे उसकी गिरफ्तारी संभव हो सके. बिहार ही नहीं, दिल्ली से लेकर भूटान तक उसकी तलाश की जा रही है.

इनाम घोषित

सूत्रों के अनुसार, इओयू की एक टीम दिल्ली में CBI अधिकारियों से संपर्क कर इस हाई-प्रोफाइल मामले में सहयोग मांग चुकी है. राज्य और केंद्र की एजेंसियों के बीच सूचना साझा की जा रही है ताकि नौ महीने से फरार आरोपी तक पहुंचने का कोई ठोस रास्ता बन सके.

राज्य गृह विभाग ने 10 अप्रैल को संजीव मुखिया पर तीन लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, वहीं उसके दो सहयोगियों नालंदा के शुभम कुमार और अरवल के राज किशोर कुमार पर एक-एक लाख रुपये का इनाम रखा गया है.

पेपर लीक गिरोह का सरगना है संजीव

जांच में सामने आया है कि संजीव मुखिया केवल नीट-यूजी (1 मई 2024) ही नहीं, बल्कि कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा (1 अक्टूबर 2023) और शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (15 मार्च 2024) के पेपर लीक का भी मास्टरमाइंड है. कॉन्स्टेबल परीक्षा को तो रद्द करना पड़ा था. उसका नाम पहली बार 2010 में एक पेपर लीक मामले में सामने आया था, लेकिन वह तब पुलिस की गिरफ्त से बच निकला था.

2016 में वह उत्तराखंड में मेडिकल परीक्षा पेपर लीक केस में पहली बार गिरफ्तार हुआ, लेकिन सबूतों के अभाव में दो महीने में जमानत मिल गयी. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वह एक अंतरराज्यीय परीक्षा माफिया गिरोह का संचालन करता है, जिसमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बंगाल, ओडिशा, राजस्थान और मध्य प्रदेश के लोग शामिल हैं. जैसे ही इन राज्यों में कोई भर्ती परीक्षा की घोषणा होती है, यह गिरोह सक्रिय हो जाता है.

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गिरफ्तारी के प्रयास और अब तक की बरामदगी

अब तक मुखिया के घर और कार्यालय पर तीन बार छापेमारी हो चुकी है. छापेमारी के दौरान 11.5 लाख रुपये नकद, कई वाहनों के दस्तावेज, दर्जनों मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किये गये हैं. सीबीआइ इस मामले में बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत 33 स्थानों पर छापेमारी कर 36 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें से 15 गिरफ्तारियां बिहार पुलिस ने की हैं.

संजीव मुखिया नालंदा जिले के नूरसराय हॉर्टिकल्चर कॉलेज में तकनीकी सहायक के पद पर कार्यरत था, अब राज्य और केंद्र की एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है. इओयू की निगाहें अब नेपाल और भूटान की ओर हैं, जहां से उसके पकड़े जाने की उम्मीद जुड़ी है.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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