हिन्दवी. एएन कॉलेज के पुस्तकालय सभागार में कैंपस कविता की हुई शुरुआत

हिन्दवी की ओर से बिहार में पहली बार एएन कॉलेज के पुस्तकालय सभागार में हिन्दवी कैंपस कविता का आयोजन किया गया. सभी का स्वागत स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो कलानाथ मिश्र ने किया. यह आयोजन दो सत्रों में बांटा गया. पहले सत्र में चयनित प्रतिभागियों की ओर से हिन्दवी काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें कुल 18 प्रतिभागियों ने भाग लिया.

संवाददाता,पटना

.हिन्दवी की ओर से बिहार में पहली बार एएन कॉलेज के पुस्तकालय सभागार में हिन्दवी कैंपस कविता का आयोजन किया गया. सभी का स्वागत स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो कलानाथ मिश्र ने किया. यह आयोजन दो सत्रों में बांटा गया. पहले सत्र में चयनित प्रतिभागियों की ओर से हिन्दवी काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें कुल 18 प्रतिभागियों ने भाग लिया. प्रतिभागियों ने तीन मिनट के समय अवधि में दो से तीन स्वरचित कविता का पाठ किया. निर्णायक की भूमिका में समकालीन हिंदी कविता का समादृत स्वर आलोक धन्वा, आदिवासी चेतना की सशक्त आवाज़ निर्मला पुतुल और कवि राकेश रंजन थे. प्रतिभागियों मे अंशु कुमारी ने अगर मैं प्रोफेसर होती, आदित्य कृष्ण ने प्रेम, कुमार मंगलम ने बजट क्या है?, गोपेश कुमार साह ने पिता और सर्द बारिश की सर्द छांव, जयंत कुमार ने वैश्याले श्रेष्ठ या विश्वविद्यालय, फूल तुम यूं इतराती क्यों हो.., ज्ञानी कुमारी ने तस्वीर की कैद, कशिश, नया कुछ नहीं का पाठ किया. दिव्या श्री ने पुरपाठ, नंदिता सिंह ने उदास चिड़िया, कैसे हो तुम, नौशाद आलम ने यही तो अपना बिहार है जैसे कविताओं को सुन श्रोताओं ने खूब तालियां बजायी. निर्णायक मंडल के निर्णय के आधार पर तीन विद्यार्थी-कवियों को विशेष सम्मान प्रदान किया गया. मालूम हो कि यह कार्यक्रम पहले देश के दस राज्यों और अठारह प्रतिष्ठित संस्थानों में सफलतापूर्वक आयोजित हो चुका है.

कविताओं के पाठ से गुंज उठा परिसर

दूसरे सत्र में कविताओं का दौर शुरु हुआ. पाठ करने वालों में वरिष्ठ कवि आलोक धन्वा हिन्दी के उन बड़े कवियों में हैं, जिन्होंने 70 के दशक में कविता को एक नयी पहचान दी. उन्होंने मंच से रेल की चमकती हुई पटरियों के किनारे वे कपड़े के पुराने जूते हैं… और मुलाकाते कविता अचानक तुम आ जाओ इतनी रेलें चलती हैं भारत में कभी कहीं से भी आ सकती हो मेरे पास…का पाठ किया. इसके बाद निर्मला पुतुल ने तीन कविताओं का पाठ किया. निर्मला संथाली और हिंदी भाषा की सुप्रसिद्ध कवयित्री, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वह लगभग दो दशकों से अधिक समय से आदिवासी महिलाओं के विस्थापन, पलायन, लैंगिक भेदभाव, मानवाधिकार जैसे विषयों पर व्यक्तिगत, सामूहिक और संस्थागत स्तर पर सक्रिय रही हैं. उन्होंने मंच से तीन कविताओं को पाठ किया जिसमें पहली कविता बाबा.. मुझे उतनी दूर मत ब्याहना जहां मुझसे मिले जाने खातिर घर की बकरियां बेचनी पड़े तुम्हे…, दूसरी कविता आओ प्रेय एक अज्ञात जलाए.. और तीसरी कविता क्या तुम जानते हो पुरुष से भिन्न एक स्त्री का एकांत? था. आखिरी कविता पाठ राकेश रंजन ने की. उन्होंने बच्ची और आतंक पर अपनी कविता का पाठ किया. मौके पर विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राएं, साहित्यकार, कवि और कॉलेज के टीचर्स मौजूद थे. पहले सत्र का संचालन कॉलेज की शिक्षक सरिता सिन्हा ने और दूसरे सत्र का रस-पूर्ण संचालन कुमार वरुण ने किया.

‘कैंपस कविता’ के ये रहे विजेता

प्रथम पुरस्कार : ज्ञानी कुमार

दूसरा पुरस्कार: गोपेश कुमार साह

तीसरा पुरस्कार : नंदिता सिंह और शिखा (संयुक्त)

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