मां का साथ बचपन में छूट गया, लेकिन सपना नहीं टूटा, नानी के घर पली हिमाली अब बनेंगी SDM, पढ़िए सफलता की पूरी कहानी

Success Story: कम उम्र में मां का साया सिर से उठ गया, लेकिन उनका सपना हिमाली राज की ताकत बन गया. नानी के घर पली-बढ़ीं हिमाली ने संघर्षों के बीच पढ़ाई जारी रखी और दूसरे प्रयास में 70वीं बीपीएससी परीक्षा पास कर एसडीएम बनने का सपना पूरा कर लिया.

Success Story: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, मंजिल जरूर मिलती है. 70वीं बीपीएससी परीक्षा में एसडीएम पद के लिए चयनित हिमाली राज की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है.

पटना वीमेंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हिमाली ने नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की है. अब वह जुलाई से शुरू होने वाली ट्रेनिंग की तैयारी कर रही हैं.

मां चली गईं, लेकिन उनका सपना साथ रहा

हिमाली की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया जिसने सबकुछ बदल दिया. कम उम्र में ही उनकी मां का निधन हो गया. मां बच्चों को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित करती थीं और शिक्षा को जीवन का सबसे बड़ा हथियार मानती थीं.

मां के जाने के बाद घर का माहौल बदल गया, लेकिन उनका सपना नहीं बदला. हिमाली ने मां की सीख को अपनी ताकत बना लिया.

नानी के घर में हुई परवरिश

मां के निधन के बाद हिमाली और उनके भाई-बहनों की पढ़ाई नानी के घर से हुई. मुश्किल समय में मामा और मामी ने माता-पिता की तरह साथ दिया. हिमाली कहती हैं कि अगर परिवार का सहयोग नहीं मिलता तो शायद वह यहां तक नहीं पहुंच पातीं. नानी घर का माहौल हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा.

चाचा को देखकर तय कर लिया था लक्ष्य

हिमाली बताती हैं कि उनके चाचा सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते थे. बचपन में उन्हें पढ़ते और मेहनत करते देखकर उन्होंने तय कर लिया था कि एक दिन उन्हें भी प्रशासनिक सेवा में जाना है. उसके बाद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई. उनके लिए सिविल सेवा सिर्फ करियर नहीं, बल्कि बचपन का सपना था.

पहली असफलता ने तोड़ा नहीं, और मजबूत बनाया

बीपीएससी की पहली कोशिश में सफलता नहीं मिली. निराशा हुई, लेकिन हार नहीं मानी. हिमाली ने अपनी कमियों को पहचाना और फिर नई रणनीति के साथ तैयारी शुरू की. उन्होंने हर असफलता को सीख में बदला और लगातार मेहनत करती रहीं.

नौकरी के साथ की तैयारी

असिस्टेंट प्रोफेसर की जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई करना आसान नहीं था. लेकिन हिमाली ने समय का सही इस्तेमाल किया. उन्होंने घंटों गिनकर पढ़ाई करने के बजाय रोजाना लक्ष्य तय किया और उसे पूरा करने पर फोकस रखा. यही आदत उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.

मोबाइल से दूरी, लक्ष्य पर पूरी नजर

हिमाली का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए अनुशासन बेहद जरूरी है. उन्होंने मोबाइल का इस्तेमाल सीमित रखा और खुद को पढ़ाई पर केंद्रित रखा. उनके मुताबिक, ईमानदारी, निरंतर मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सफलता की असली कुंजी है.

अब शुरू होगी नई जिम्मेदारी

मां की याद, नानी का आशीर्वाद, मामा-मामी का साथ और खुद की मेहनत… इन सबके दम पर हिमाली राज ने एसडीएम बनने का सपना पूरा कर लिया है. उनकी कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को छोड़ना नहीं चाहते.

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By Abhinandan pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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