Narayana Cancer Centre: नारायणा कैंसर सेंटर के निदेशक एवं पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. अभिषेक आनंद ने बताया कि सिर एवं गले का कैंसर मुंह, जीभ, गले, नाक और आवाज से जुड़े हिस्सों को प्रभावित कर सकता है. मुंह में लंबे समय तक रहने वाला घाव या छाला, निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव, गले या गर्दन में गांठ, कान में लगातार दर्द और बिना कारण वजन कम होना इसके चेतावनी संकेत हो सकते हैं.
प्रिसिजन मेडिसिन से व्यक्तिगत उपचार
डॉ. आनंद ने बताया कि कैंसर के इलाज में प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine) की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है. इसका उद्देश्य मरीज के कैंसर की जैविक और आणविक विशेषताओं को समझकर उसके लिए उपयुक्त उपचार रणनीति तैयार करना है.
उन्होंने कहा, “हर मरीज का कैंसर एक जैसा नहीं होता. बीमारी की स्टेज के साथ-साथ ट्यूमर की विशेषताओं, पैथोलॉजी, इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री और जरूरत पड़ने पर अन्य बायोमार्कर या मॉलिक्यूलर जांचों के आधार पर उपचार तय किया जा सकता है.”
प्रिसिजन मेडिसिन के माध्यम से कुछ मरीजों में टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसे आधुनिक उपचार विकल्पों की उपयोगिता का पता लगाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इन जांचों और उपचारों की आवश्यकता मरीज की स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टर तय करते हैं.
डॉ. आनंद ने कहा, “कैंसर का उपचार मरीज और उसके कैंसर की विशेषताओं को समझकर किया जाना चाहिए. प्रिसिजन मेडिसिन उपचार को अधिक व्यक्तिगत और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.”
उन्होंने बताया कि सिर एवं गले के कैंसर में सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी का उपयोग बीमारी के अनुसार किया जाता है.
डॉ. आनंद ने लोगों से अपील की कि तंबाकू से दूर रहें और मुंह या गले में लंबे समय तक रहने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें. समय पर जांच, सटीक निदान और उचित उपचार कैंसर के खिलाफ लड़ाई के महत्वपूर्ण आधार हैं.
