पटना में PhD स्कॉलर्स का आंदोलन 15वें दिन भी जारी, मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने तक अनशन जारी रखने का ऐलान

गर्दनीबाग में पीएचडी शोधार्थियों का आमरण अनशन 15वें दिन भी जारी है. मांगों पर अड़े दो अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. शासन से लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा.

Patna PhD Scholars Protest: गर्दनीबाग स्थित धरनास्थल पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्यभर से जुटे PhD स्कॉलर्स चार अगस्त से आमरण अनशन कर रहे हैं. अनशनकारियों का कहना है कि जब तक शासन स्तर से उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आमरण अनशन समाप्त नहीं होगा. अब तक शासन स्तर से आंदोलनकारियों के साथ सीधी वार्ता नहीं हो सकी है.

शासन से लिखित आश्वासन मिलने तक जारी रहेगा अनशन

अनशनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक शासन स्तर से उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आमरण अनशन समाप्त नहीं होगा. अब तक शासन स्तर से आंदोलनकारियों के साथ सीधी वार्ता नहीं हो सकी है. ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार के बैनर तले शोधार्थी सहायक प्राध्यापक नियुक्ति प्रक्रिया में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. आंदोलन की शुरुआत चार अगस्त से हुई है. कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता और बीक्कू सिंह प्रधान आमरण अनशन पर बैठे हैं. इनके समर्थन में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से शोधार्थी पटना पहुंच रहे हैं.

छह सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन

शोधार्थियों ने छह सूत्री मांगपत्र जारी किया है. इसमें यूजीसी की पुरानी नियमावली के प्रावधान लागू करने, पीएचडी और नेट-जेआरएफ के लिए अलग-अलग वेटेज निर्धारित करने, अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करने, सभी विषयों के रिक्त पदों पर नियमित बहाली, चयन प्रक्रिया में डोमिसाइल नीति लागू करने और स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों के अंग के रूप में विकसित करने की मांग शामिल है.

शोधार्थियों की प्रमुख मांग असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया में यूजीसी के पुराने नियमों के प्रावधानों को लागू करना है. आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक शोध और उच्च शिक्षा में समय लगाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए.

पीएचडी, नेट और जेआरएफ के लिए अलग वेटेज की मांग

शोधार्थियों ने पीएचडी को अनिवार्य करते हुए नेट को पांच अंक, जेआरएफ को सात अंक, पीएचडी को 30 अंक और एमफिल को पांच अंक का वेटेज देने की मांग की है. उनका कहना है कि नेट के बाद जेआरएफ प्राप्त करना और पीएचडी की प्रक्रिया पूरी करना अलग-अलग स्तर की शैक्षणिक उपलब्धियां हैं. ऐसे में इनके लिए उचित वेटेज निर्धारित किया जाना चाहिए.

अनशनकारी कुमुद पटेल ने कहा कि पीएचडी और जेआरएफ को एक समान मानना उचित नहीं है. उनके अनुसार पीएचडी पूरी करने में शोध कार्य, थीसिस तैयार करने, मूल्यांकन और स्वीकृति समेत कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. कई शोधार्थियों को पीएचडी पूरी करने में पांच से आठ वर्ष तक का समय लग जाता है.

डोमिसाइल नीति और आयु सीमा 55 वर्ष करने की मांग

प्रदर्शनकारी शोधार्थी सहायक प्राध्यापक बहाली में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि बिहार के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता का हनन रोका जाना चाहिए. साथ ही वर्षों से विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों को नियमित सहायक प्राध्यापक नियुक्ति से पहले सेवा सामंजन का लाभ देने की मांग भी की गयी है.

शोधार्थियों का कहना है कि उच्च शिक्षा और शोध की प्रक्रिया पूरी करने में अभ्यर्थियों की उम्र बढ़ जाती है. समय पर वैकेंसी नहीं आने से कई योग्य अभ्यर्थी आयु सीमा पार कर जाते हैं. इसलिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करने की मांग की जा रही है.

8 हजार से अधिक पदों पर बहाली की उम्मीद

शोधार्थियों का कहना है कि राज्य में आठ हजार से अधिक प्रोफेसर पदों पर बहाली की बात सामने आ रही है. ऐसे में लंबे समय से पीएचडी की डिग्री हासिल कर नियुक्ति का इंतजार कर रहे शोधार्थियों को मौका मिलना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नियमों में आयु सीमा समेत कई प्रावधान ऐसे हैं, जिनसे बड़ी संख्या में योग्य शोधार्थी नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं.

तीन शोधार्थी कई दिनों से आमरण अनशन पर हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि वार्ता के लिए नहीं पहुंचा है. उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रशासन की ओर से मेडिकल टीम आती है और ब्लड प्रेशर तथा पल्स की जांच कर लौट जाती है.

असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से पहले BET कराने की मांग

असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली से पहले BET (Bihar Eligibility Test) का आयोजन कराने की मांग की गई है. साथ ही TRE-4 की भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने तथा पूर्व की परीक्षाओं के अनुरूप एकल परीक्षा और "One..." व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है.

पटना में PhD स्कॉलर्स के साथ अन्य छात्र भी अनशन पर, अलग-अलग मांगों को लेकर जारी है आंदोलन

70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग

मांगों में 70वीं BPSC परीक्षा को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की गई है. इसके साथ ही BSSC की ओर से आयोजित इंटरमीडिएट, CGL, ASO, BSO सहित सभी लंबित परीक्षाओं को जल्द से जल्द आयोजित करने की मांग रखी गई है.

1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती परीक्षा रद्द करने की मांग

मांगों में 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती परीक्षा को पूरी तरह निरस्त करने की मांग भी शामिल है. परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रश्नपत्र और उत्तर-कुंजी अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराने की मांग की गई है.

रद्द परीक्षाओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग

BPSC की ओर से आयोजित AEDO, SANITARY सहित विभिन्न रद्द परीक्षाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है. वहीं, CSBC की ओर से आयोजित सभी भर्ती प्रक्रियाओं में परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र, उत्तर-कुंजी और OMR शीट उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है.

लंबित भर्तियों को जल्द पूरा करने की मांग

मांगों में 18 वर्षों से लंबित लाइब्रेरियन भर्ती और चार वर्षों से लंबित लेखापाल भर्ती को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की गई है. बिहार में आयोजित सभी भर्ती प्रक्रियाओं में अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित करने की मांग भी की गई है.

85% डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग

बिहार की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में 85% डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग की गई है. इसके अलावा सभी भर्ती प्रक्रियाओं में संविदा कर्मियों को दिए जाने वाले वेतन को पूर्णतः समान करने की मांग भी शामिल है.

भर्ती परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर जारी करने की मांग

बिहार की सभी भर्ती परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर जारी करने और उसका सख्ती से पालन करने की मांग की गई है. मांगों की सूची में पेपर लीक संबंधी मामलों पर भी कार्रवाई की मांग शामिल है.

पप्पू यादव और राजेश राम ने किया आंदोलन का समर्थन

आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला है. कांग्रेस सांसद पप्पू यादव और बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम धरनास्थल पर पहुंचकर शोधार्थियों से मुलाकात कर चुके हैं और उनकी मांगों का समर्थन किया है. भाकपा माले की विधान पार्षद शशि यादव और विधायक संदीप सौरभ ने भी अनशन स्थल पर पहुंचकर शोधार्थियों से मुलाकात की और उनकी मांगों के समर्थन का ऐलान किया.

विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली यूजीसी के नियमों के अनुरूप होनी चाहिए. उन्होंने लंबे समय से वैकेंसी का इंतजार कर रहे शोधार्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में उचित अवसर देने और आयु सीमा में पर्याप्त छूट देने की मांग की.

सरकार से तत्काल वार्ता की मांग

संदीप सौरभ ने कहा कि छह दिनों से युवा शोधार्थी आमरण अनशन पर हैं और सरकार की ओर से किसी प्रतिनिधि का उनसे मिलने नहीं आना गंभीर विषय है. उन्होंने सरकार से आंदोलनकारी शोधार्थियों से तत्काल वार्ता करने की मांग की.

फिलहाल गर्दनीबाग में जारी आमरण अनशन बिहार में उच्च शिक्षा की नियुक्ति प्रक्रिया, आयु सीमा, शोधार्थियों के अधिकार और डोमिसाइल नीति को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है. सरकार की ओर से बातचीत के लिए पहल का इंतजार है.


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लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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