Bihar Politics: बिहार की राजनीति में नई सरकार को लेकर हलचल तेज हो गई है. अब चर्चा सिर्फ मुख्यमंत्री के चेहरे तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरा फोकस इस बात पर है कि सरकार बनने के बाद किस पार्टी को कितना हिस्सा मिलेगा. यानी असली लड़ाई पावर शेयरिंग को लेकर है.
जदयू का क्या तर्क
सूत्रों के मुताबिक, JDU और BJP के बीच इसी फॉर्मूले पर अंदरखाने बातचीत चल रही है. पहले जब जेडीयू का मुख्यमंत्री था, तब बीजेपी के दो डिप्टी सीएम लंबे समय तक सरकार में रहे. अब जेडीयू उसी तर्क पर मांग कर रही है कि अगर इस बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है, तो जेडीयू को दो डिप्टी सीएम पद मिलने चाहिए.
जेडीयू स्पीकर पद पर भी अपनी दावेदारी जता रही है. पार्टी का कहना है कि पहले भी 2020 तक स्पीकर का पद उसके पास रहा है, इसलिए इस बार भी उसे वही जिम्मेदारी दी जाए. इससे साफ है कि जेडीयू पुराने फॉर्मूले को दोहराने की कोशिश कर रही है, ताकि सत्ता में उसकी पकड़ मजबूत बनी रहे.
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बीजेपी खुद को मजबूत दिखाना चाहती है
बीजेपी भी इस पूरे समीकरण को अपने हिसाब से साधने में लगी है. पार्टी चाहती है कि सरकार में उसका रोल ज्यादा मजबूत दिखे, लेकिन साथ ही सहयोगी दलों को भी संतुलित रखना जरूरी है. यही वजह है कि बातचीत में हर पद और जिम्मेदारी को लेकर काफी मंथन चल रहा है.
कुल मिलाकर, बिहार में सरकार बनाना अब सिर्फ नंबर गेम नहीं रह गया है. असली खेल इस बात का है कि कौन पार्टी कितनी ताकत अपने हाथ में रखेगी. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों दलों के बीच क्या फाइनल फॉर्मूला तय होता है और सत्ता का संतुलन कैसे बनता है.
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