Bihar Next CM Suspense : बिहार में सत्ता बदलने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. लगभग 10 दिन का समय बाकी है. इस बीच बड़ा सवाल ये है कि Nitish Kumar के बाद कौन संभालेगा कमान? हालांकि सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे है. मगर बिहार में संघ की दूरगामी रणनीति के और बीजेपी के ‘सरप्राइज’ से सस्पेंस बरकरा है. बिहार के मुख्यमंत्री राज्यसभा जा रहे हैं. वो 10 अप्रैल को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे.
18 अप्रैल तक नया CM लेकिन अब भी सस्पेंस
अनुमान लगाया जा रहा है 14 अप्रैल तक वो बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. इसके बाद 18 अप्रैल तक नए मुख्यमंत्री को शपथ लेने की संभावना को लगभग तय माना जा रहा है. मगर बड़ा सवाल ये है कि अब तक मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा नहीं की गई. हालांकि इस रेस में फिलहाल सम्राट चौधरी जरूर आगे चल रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन पर भरोसा जताते नजर आ रहे हैं. मगर सम्राट चौधरी के नाम का कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है.
सम्राट चौधरी रेस में आगे, आधिकारिक मुहर नहीं
अब लगभग 10 दिन शेष बचे हैं, जब Nitish Kumar Bihar के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. लेकिन अब तक बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार है. में बिहार की राजनीति में भी कई तरह के कयास लगने शुरू हो गए हैं. ये लाजमी भी है. बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान को लेकर जितना सस्पेंस क्रिएट हो रहा है, उससे इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि बीजेपी इस दौरान सम्राट चौधरी के अलावा भी कोई नया चेहरा तलाश रही है.
क्या BJP खोज रही है नया चेहरा? सस्पेंस दे रहा संकेत
राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि इसमें कोई शक नहीं है के सम्राट चौधरी संघ की पसंद नहीं हैं. बिहार की राजनीति पर निगाह रखने वाले रमाकांत चंदन ये मानते हैं कि सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा संघ है. रमाकांत कहते हैं कि संघ चाहता है कि बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर उनकी संस्कृति, उसके विचारों का हो. और सम्राट चौधरी संघ के प्रोडक्ट नहीं हैं. लिहाजा बिहार मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस और गहराता नजर आ रहा है.
‘संघ विचारधारा वाला CM’ की तलाश में अटका मामला
रमाकांत कहते हैं, संघ अपनी दूरगामी रणनीति पर काम करता है. उसकी रणनीति में बांग्लादेशी घुसपैठ और सीमाओं को सुरक्षित करना भी है. इसके लिए जरूरी है कि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में संघ के विचारों वाला सरकार में हो. फिलहाल बिहार, बंगाल और झारखंड में ये चुनौती बनी हुई है. ऐसे में ये देखने वाली बात ये होगी कि बिहार में सत्ता के हस्तांतरण में क्या होता? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद क्या बीजेपी संघ के विचारों वाला मुख्यमंत्री लाने में सफल होती है? या Samrat Choudhary के चेहरे को आगे कर खेलकर फिलहाल उन्हीं के जरिए राजनीतिक दांव खेलती है.
BJP का ‘सरप्राइज CM’ इतिहास, सम्राट के लिए खतरे की घंटी?
खैर, ये तो आने वाला वक्त बताएगा. मगर BJP का मुख्यमंत्रियों को लेकर चौंकाने वाला इतिहास, सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद पर काले बादल की तरह नजर आ रहा है. वहीं, सम्राट चौधरी का भविष्य इस बात पर भी तय होगा कि गृहविभाग और विधानसभा अध्यक्ष का पद किसके पास होता है! राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा है कि JDU गृहविभाग और विधानसभा अध्यक्ष का पद अपने खाते में रखना चाहती है. ताकि बीजेपी पर नियंत्रण रखा जा सके. इसके अलावा बड़े भाई की भूमिका में इस बार बीजेपी जरूर होगी मगर मंत्रिमंडल में जेडीयू ज्यादा विभागों पर कब्जा चाहती है.
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