'उपेंद्र राज्यसभा गए तो बदल गए समीकरण', लीक हुई चिट्ठी पर दिलीप जायसवाल की सफाई

Bihar MLC Chunav: बिहार एमएलसी चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी (RLM) ने भाजपा के साथ हुआ एक गुप्त समझौता पत्र सोशल मीडिया पर लीक कर दिया है. इस पर दिलीप जायसवाल ने भी सफाई दी है.

Bihar MLC Chunav: राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश का विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में एनडीए से टिकट कट गया है. इससे उनका मंत्री पद खतरे में पड़ गया है. इस फैसले से नाराज आरएलएम नेताओं ने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का एक कथित गुप्त समझौता पत्र सोशल मीडिया पर लीक कर दिया है. इस चिट्ठी में भाजपा की तरफ से आरएलएम को एक एमएलसी सीट देने का लिखित वादा किया गया था. अब इस मामले पर बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने प्रतिक्रिया दी है.

लीक हुई सीक्रेट चिट्ठी पर मंत्री दिलीप जायसवाल क्या बोले

चिट्ठी सार्वजनिक होने के बाद भाजपा नेता और मंत्री दिलीप जायसवाल ने सफाई दी है. उन्होंने स्वीकार किया कि विधानसभा चुनाव के समय दोनों दलों के बीच एक एमएलसी सीट देने पर लिखित सहमति बनी थी. बाद में जब खुद उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए कोटे से राज्यसभा भेज दिया गया, तो पुराने राजनीतिक समीकरण और वादे पूरी तरह बदल गए.

कथित लीक पत्र

सदन का सदस्य होना है जरूरी

बिहार में खाली हो रही एमएलसी की 10 सीटों पर चुनाव हो गया है. इसमें एनडीए ने अपने 9 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की. इस सूची में भाजपा और जदयू के 4-4 तथा लोजपा (रा) का 1 प्रत्याशी और महागठबंधन की ओर से राजद ने 1 उम्मीदवार हैं. इस फाइनल लिस्ट में मंत्री दीपक प्रकाश का नाम न होने से उनका सियासी भविष्य संकट में है. नियमों के मुताबिक मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें छह महीने के अंदर किसी भी एक सदन का सदस्य होना अनिवार्य है.

पार्टी के विलय वाले प्रेशर के आगे नहीं झुके उपेंद्र कुशवाहा

राजनीतिक हलकों में आरएलएम को टिकट न मिलने के पीछे पार्टी के विलय का दबाव माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजते समय और दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए रखने की चर्चा के दौरान भाजपा ने आरएलएम का विलय करने का मुद्दा उठाया था.

आरएलएम के तीन प्रमुख नेता आलोक कुमार सिंह, रामेश्वर महतो और माधव आनंद भी भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे थे. इसके बावजूद, उपेंद्र कुशवाहा ने साफ कर दिया है कि वे केवल किसी पद या सीट के लिए अपनी पार्टी का स्वतंत्र अस्तित्व भाजपा में विलीन नहीं करेंगे.

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विधानसभा चुनाव के वक्त सीटों के बंटवारे में हुआ था समझौता

आरएलएम कार्यकर्ताओं का दावा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान सीटों के तालमेल पर मतभेद दूर करने के लिए भाजपा ने यह गुप्त समझौता किया था. तब भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 5 विधानसभा सीटों के साथ-साथ एक एमएलसी सीट देने का लिखित भरोसा दिया था. अब वादा पूरा न होने से नाराज होकर ही आरएलएम ने इस लिखित सहमति को सार्वजनिक कर गठबंधन सहयोगियों के सामने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर दी है.

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Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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