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बिहार चुनाव 2020 की सबसे चर्चित राघोपुर विस सीट में BJP की जोर आजमाइश, जुटी है यादव वोटरों में सेंध लगाने में, जानें यहां का इतिहास

By Prabhat Khabar Print Desk
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Bihar Chunav 2020, Raghopur seat, Yadav Voters, BJP, RJD:
Bihar Chunav 2020, Raghopur seat, Yadav Voters, BJP, RJD:
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Bihar Chunav 2020, Raghopur seat, Yadav Voters, BJP, RJD: बिहार के सबसे चर्चित सीटों में शुमार राघोपुर विधानसभा क्षेत्र कई मायने में काफी अलग है. चाहे इसकी भौगोलिक स्थिति की बात हो या सामाजिक, दोनों एकदम अलग हैं. गंगा पार करने के साथ ही पटना के पास होते हुए भी यह एकदम सुदूर इलाके का अहसास कराता है.

राघोपुर इलाके में वोटरों का एक बड़ा वर्ग है, जो खुलकर बेबाक तरीके से अपनी राय रखता है, बिना किसी संकोच के. पसंद और नापसंद बताने में इन्हें कोई गुरेज नहीं है और इनके वर्ग के हिसाब से इनके पसंद भी साफ हैं.

दो जाति यादव और राजपूत बहुलता वाले इस क्षेत्र में एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जो एकदम चुप है और सीधे चुनाव के दिन ही मुखर होकर मतदान करके अपनी बेबाकी दिखाने में विश्वास करता है. ये ‘चुप्पा’ वोटर मुख्य रूप से अतिपिछड़ा और दलित समाज के हैं. लगभग सभी गांवों में इनकी आबादी कम-ज्यादा है.

इन पर भी काफी हद तक इस क्षेत्र की हार और जीत का समीकरण निर्भर करता है. राघोपुर में लड़ाई राजद के तेजस्वी यादव और भाजपा के सतीश राय के बीच है.

राघोपुर में भाजपा और राजद आमने-सामने हैं. दोनों दल के उम्मीदवार एक ही समाज से आते हैं, परंतु तेजस्वी यादव को यहां के लोग उनके पिता लालू प्रसाद की वजह से ही ज्यादा बेहतर तरीके से जानते हैं. उनके लिए यह विरासत की सीट रही है.

हालांकि, इतिहास के पन्नों को पलटे तो पता चलेगा कि उनकी मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी यहां से चुनाव हार चुकी हैं. इससे यह साफ होता है कि यहां के वोटरों का मिजाज बदले देर नहीं लगती है. एक बात दिल को लगी नहीं कि मिजाज बदल जाता है. इस बार इनके जहन में 10 लाख नौकरी देने की बात कहीं बैठ गयी है. भाजपा भी यादव वोटरों को अपनी तरफ तोड़कर अपना समीकरण बैठाने की जुगत में लगी है, जबकि राजद अपने सभी वोटरों को गोलबंद करने में जुटा है.

तभी तो रुस्तमपुर के 83 वर्षीय वासु राय कहते हैं कि ‘एक बार एकरो जीता के देख ही’. जीतने पर कहीं रोजगार का उपाये करा दें. पटना से गांगा की लहरों को पीपा पुल से पार करने के बाद राघोपुर इलाके का सबसे पहला गांव रुस्तमपुर ही पड़ता है. बाढ़ में इस इलाके का काफी बड़ा हिस्सा पानी में डूब जाता है. फिर भी यहां के लोगों के पसंद में कोई अंतर नहीं है.

यहीं की रीता देवी और संगीता देवी कहती हैं कि मौजूदा सरकार ने काम तो किया है, लेकिन कई योजनाओं का रख-रखाव सही नहीं होने से इनका लाभ नहीं मिल रहा है. घर के सामने के टूटे नल को दिखाते हुए कहती हैं कि यह हाल नल-जल योजना का है. कुछ दिनों बाद ही इस योजना ने इलाके में दम तोड़ दिया. यहां से थोड़ा आगे बढ़ने पर आता है मल्लिकपुर. एक छोटी सी चट्टी या छोटा ग्रामीण बाजार है, जिनमें कुछ दुकानें हैं.

परंतु एक सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) या सुविधा केंद्र भी है. पास में एक छोटा कोचिंग सेंटर भी है. इसके पास ही रहने वाले मनीष कुमार और विनोद राय कहते हैं कि मौजूदा विधायक एक दिन भी जीतने के बाद नहीं आये. बाढ़ में डूबने पर भी देखने नहीं आये. ऐसे पर फिर से भरोसा करने का मन नहीं करता है.

मोहनपुर कबीर चौक के पास भाजपा प्रत्याशी का बड़ा का कार्यालय दिखा, लेकिन इसमें कम लोग थे. कारण था कि यहां से थोड़ी दूरी पर मोहनपुर रेफरल अस्पताल के मैदान में भाजपा के दो दिग्गज नेताओं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बिहार प्रभारी सांसद भूपेंद्र यादव की सभा होनी थी.

इस तिराहे पर मौजूद कुछ दुकानदारों ने विकास की दुहाई देते हुए इसे आगे भी जारी रखने की बात कही. भाजपा के सभा स्थल के पास पहुंचने पर कई लोग जमा दिखे. चाय-नाश्ता और पास की खैनी दुकान पर लोगों का मजमा लगा था. चर्चा हो रही थी कि तीन दिन पहले तेजस्वी यादव की यहां रैली हुई थी, तो हजारों की संख्या में लोग आये थे. आज की रैली में उसकी तुलना में कम लोग लोग हैं.

भाजपा नेताओं को सुनने आये उमेश, विनोद, शंभु, रूदल समेत कई लोगों ने बताया कि यहां अस्पताल और पास में एक कृषि विकास केंद्र जैसे भवन तो इसी सरकार में बने हैं, लेकिन अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं. थोड़ी तकलीफ बढ़ने पर यहां से सीधे पटना रेफर कर देते हैं. चोट लगने पर मलहम-पट्टी तक नहीं होती. यहां से पटना ले जाने में काफी मशक्कत होती है.

ऐसे अस्पताल से क्या फायदा. इसी तरह नल-जल योजना और कृषि सुविधा केंद्र को लेकर भी लोगों में काफी नाराजगी है. व्यवस्था बहाल हुई, लेकिन सुविधा लोगों को नहीं मिल रही है. इसका काफी दुख है.

मोहनपुर के पास ही भाजपा प्रत्याशी सतीश यादव का गांव रामपुर भी है. यहां के लोग गांव वाले के साथ हैं. परंतु इससे थोड़ा आगे जाने पर फतेहपुर गांव आता है, जहां की कहानी एकदम अलग है. यहां गांव लोजपा प्रत्याशी राकेश रौशन का पैतृक गांव है. यहां के चौक पर दुकान देने वाले सोनू ने बताया कि वह उसके जैसे कई युवा अपने गांव के ही उम्मीदवार को चुनेंगे.

आखिर उनका यह कर्तव्य है. शिवदत दास एक सीएससी चलाते हैं, वह भी अपने जानने वाले प्रत्याशी पर ही भरोसा जताते हैं. सरकार के काम से नाराजगी नहीं है, लेकिन अन्य कई बातें भी हैं, जो ज्यादा अहमियत रखती हैं. इसी चौक पर एक निजी फाइनेंस कंपनी का दफ्तर भी खुला है. इसके संचालक कहते हैं, रोजाना 50 से 70 हजार रुपये का लेन-देन कर लेते हैं.

परंतु पहले यह संभव नहीं हो पाता. इसी सरकार में यह मुमकिन हो पाया है और लोग भी बेखौफ लेन-देन करते हैं. यह बड़ा बदलाव है. आगे भी यही होना चाहिए. इसी तरह हैवतपुर, खुदीपुर समेत कई गांव के लोग यह कह रहे हैं कि लोजपा उम्मीदवार के आने से भाजपा में सेंधमारी हुई है. फिर भी लड़ाई तो दो के बीच ही है.

(राघोपुर से कौशिक रंजन)

Posted By: Sumit Kumar Verma

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