Mahagathbandhan Seat Sharing: सीट शेयरिंग पर कांग्रेस ने लालू यादव के सामने रखी दो शर्तें, इससे कम पर समझौता नहीं और दूसरा?

Mahagathbandhan Seat Sharing: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर पेंच फंसता दिखाई दे रहा है. कांग्रेस पार्टी इस बार किसी भी हाल में कम सीटों पर समझौता को तैयार नहीं है. इसके अलावा भी बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने एक शर्त रखी है.

Mahagathbandhan Seat Sharing: बिहार में कांग्रेस को राजद की पिछलग्गू पार्टी का टैग मिला हुआ है. NDA के नेता हर दूसरे दिन कांग्रेस पर यह कहकर हमला बोलते रहते हैं. इस छवि से उबरने के लिए पार्टी आलाकमान ने बिहार कांग्रेस के चीफ और प्रभारी को बदला. राजेश राम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और कृष्णा अल्लावरु प्रभारी बनाये गए. लालू परिवार की नाराजगी के बावजूद कांग्रेस ने कन्हैया कुमार और पप्पू यादव को मंच दिया. अब कांग्रेस प्रभारी ने लालू यादव के सामने सीट शेयरिंग पर दो शर्तें रखी हैं.

सीट शेयरिंग पर बात करेंगे कृष्णा अल्लावरू

बिहार में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर हो इसलिए राहुल गांधी खुद मोर्चा संभाले हुए हैं. इस साल वो कई बार बिहार का दौरा कर चुके हैं. हाल ही में उन्होंने मतदाता अधिकार यात्राभी बिहार के कई जिलों में निकाला था. इसी बीच सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के रणनीतिकारों ने दो फॉर्मूला महागठबंधन में शामिल दलों के सामने पर रख दिए हैं. इन पर बातचीत के लिए बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु को चुना गया है.

क्या है सीट शेयरिंग का फॉर्मूला नंबर वन

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कांग्रेस ने राजद के सामने वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में मिली 70 सीटों की संख्या तो जस के तस तो रख दी है. लेकिन इसमें भी एक ट्विस्ट है. पार्टी ने उन सीटों की मांग नहीं की है जो 2020 में दिया गया था. राहुल गांधी की यात्रा के बाद कांग्रेस के रणनीतिकारों ने कमजोर विधानसभा सीटों का आंकलन कर उन सीटों को अपनी लिस्ट से बाहर कर दिया है. कांग्रेस ने इनके बदले अपनी सूची में कई ऐसी सीटों का नाम जोड़ा है, जहां मुस्लिम, सवर्ण, दलित और अतिपिछड़ा वोटर्स की संख्या ज्यादा है.

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दूसरा फार्मूला क्या है

दूसरा फार्मूला महागठबंधन की मेज पर यह रखा गया है कि अलायन्स में पार्टी का प्रेजेंस दूसरे स्थान पर है. ऐसे में डिप्टी सीएम के पद पर दावेदारी बनती है. अगर इस पद को लेकर कन्फर्मेशन मिल जाता है तो सीटों की संख्या को लेकर पार्टी थोड़ा लिबरल रुख अपना सकती है. ऐसे में पार्टी 50 से 60 सीटों के बीच चुनाव लड़ने को तैयार हो जाएगी.

इसमें में एक शर्त यह रखा गया है कि उन 19 सीटों पर कोई समझौता नहीं होगा जिन पर पार्टी का जीती हुई है. पार्टी ने राजद के सामने यह भी शर्त रखी है कि हर जिले में कम से कम एक सीट जरुर मिले और उन सीटों को कांग्रेस को ना दिया जाये जहां से NDA के उम्मीदवार पिछले कई चुनाव से लगातार जीत दर्ज कर रहे हैं.

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क्या था 2020 का फार्मूला

विधानसभा चुनाव 2020 में आरजेडी ने बड़े भाई की भूमिका निभाई थी और 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इसमें से 75 सीटों पर जीत मिली थी. पार्टी बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. कांग्रेस ने 70 सीटों में से 19 पर जीत दर्ज की थी.

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लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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