भरत तिवारी एनकाउंटर केस: पटना हाई कोर्ट ने 3 हफ्ते में सरकार से मांगा जवाब

Bharat Tiwari Encounter: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है. अदालत ने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल डेटा सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है.

Bharat Tiwari Encounter: पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार से भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने का आदेश दिया है. जज अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए घटना से जुड़े तमाम जरूरी डिजिटल और सबूतों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं.

सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल डेटा सुरक्षित रखने का आदेश

अदालत ने मृतक भरत भूषण तिवारी से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और उनके मोबाइल डेटा को संभालकर रखने के निर्देश दिए हैं. यह रिट याचिका भरत भूषण की मां आशा देवी ने दाखिल की है. उन्होंने अपने बेटे की मौत को पूरी तरह फर्जी पुलिस एनकाउंटर करार देते हुए निष्पक्ष और आजाद जांच की गुहार लगाई है.

सरेंडर के बावजूद गोली मारने का आरोप

याचिका में दावा किया गया है कि 17 जून 2026 को हुई पुलिस कार्रवाई में भरत भूषण की जान गई थी. वह पहले ही पुलिस के सामने सरेंडर कर चुका था. याचिका में मांग की गई है कि मामले से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, आरोपी पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज की जाए और मामले की जांच सीबीआई या कोर्ट की निगरानी में बनी एसआईटी से कराई जाए.

सबूत नष्ट होने की आशंका पर कोर्ट का एक्शन

अदालत में याचिकाकर्ता की तरफ से वकील अमित कुमार ने पैरवी की. उन्होंने कोर्ट को बताया कि घटना से जुड़े वीडियो, मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत केस को सुलझाने के लिए बहुत जरूरी हैं. अगर इन्हें तुरंत सुरक्षित नहीं किया गया, तो सबूतों से छेड़छाड़ या नष्ट किए जाने का बड़ा खतरा है. इस दलील को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने सरकार को सबूतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तीन हफ्ते में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया.

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विवाद की वजह

जून 2026 में हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला पूरे बिहार में भारी चर्चा में रहा था. उस वक्त पुलिस ने दावा किया था कि जवानों ने अपनी जान बचाने के लिए आत्मरक्षा में गोली चलाई थी. वहीं दूसरी तरफ, परिजनों का साफ कहना है कि भरत भूषण ने खुद सरेंडर कर दिया था, फिर भी उसे गोली मार दी गई. इसी न्याय की आस में मां ने पटना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस पूरे मामले की अगली सुनवाई अब 28 अगस्त 2026 को होगी.

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लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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