Phulwari Sharif Nagar Parishad Election: फुलवारी शरीफ नगर परिषद को भंग कर प्रशासनिक व्यवस्था लागू किए जाने के फैसले पर निवर्तमान अध्यक्ष मोहम्मद आफताब आलम ने बिहार सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाये हैं. उन्होंने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले नगर परिषद को भंग कर देना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.
13 मई को नगर परिषद भंग कर लागू की गयी प्रशासनिक व्यवस्था
मोहम्मद आफताब आलम के अनुसार, 13 मई 2026 को फुलवारी शरीफ नगर परिषद को भंग कर प्रशासनिक व्यवस्था लागू कर दी गयी. इसी क्रम में खगौल और दानापुर निजामत नगर निकायों को भी भंग किया गया. उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुने गये मुख्य पार्षद, उपमुख्य पार्षद और वार्ड पार्षदों का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही निर्वाचित व्यवस्था समाप्त कर दी गयी.
परिसीमन के बाद 28 से बढ़कर 38 हुए वार्ड
आफताब आलम ने बताया कि पहले फुलवारी शरीफ नगर परिषद में 28 वार्ड थे, लेकिन परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या बढ़ाकर 38 कर दी गयी है. उनके अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में भी फुलवारी शरीफ नगर परिषद के लिए 38 वार्ड दर्ज हैं.
2026 की नगरपालिका चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने का दावा
उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया के साथ नगर निकाय चुनाव की तैयारी भी चल रही थी. राज्य निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार फुलवारी शरीफ, दानापुर निजामत और खगौल नगर निकायों को वर्ष 2026 की नगरपालिका आम निर्वाचन प्रक्रिया में शामिल किया गया था.
चुनाव में देरी हुई तो जाएंगे कोर्ट
निवर्तमान अध्यक्ष ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक निर्देशों के अनुसार नगर निकायों का चुनाव निर्धारित समय सीमा के भीतर कराया जाना चाहिए. नगर परिषद भंग होने के बाद चुनाव में अनावश्यक देरी हुई तो इसके लिए सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को जवाबदेह होना पड़ेगा.
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि समय सीमा के भीतर फुलवारी शरीफ नगर परिषद का चुनाव नहीं कराया गया तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे. उन्होंने इसे सिर्फ जनप्रतिनिधियों का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय बताया.
जल्द चुनाव कराने की मांग
आफताब आलम ने बिहार सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जल्द चुनाव कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि फुलवारी शरीफ नगर परिषद में फिर से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के माध्यम से स्थानीय निकाय की व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए.
बता दे कि चुनाव की निर्धारित समय सीमा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़े दावों की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित न्यायिक आदेशों और सरकारी अधिसूचनाओं के मूल दस्तावेजों के आधार पर तय होगी. उपलब्ध जानकारी के अनुसार फुलवारी शरीफ नगर परिषद का परिसीमन पूरा हो चुका है और इसे वर्ष 2026 की नगरपालिका चुनाव प्रक्रिया में शामिल किया गया था.
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