पटना में जल मेट्रो सेवा के लिए आइडब्ल्यूएआइ से 908 करोड़ का समझौता

बिहार सरकार के पर्यटन विभाग और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के बीच 908 करोड़ रुपये की लागत वाली जल मेट्रो परियोजना को लेकर समझौता हुआ है.

– गुजरात के भावनगर में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के साथ बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर ने हस्ताक्षर किये

– वातानुकूलित जलयान बैटरी और ईंधन दोनों पर चलेगा, 100 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगेसंवाददाता, पटना

राजधानी पटना में अब जल मेट्रो सेवा शुरू होने जा रही है. शहरी जल परिवहन प्रणाली को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने के उद्देश्य से बिहार सरकार के पर्यटन विभाग और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के बीच 908 करोड़ रुपये की लागत वाली जल मेट्रो परियोजना को लेकर समझौता हुआ है. यह समझौता गुजरात के भावनगर में केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल और मनसुख मांडविया की मौजूदगी में किया गया. इसके साथ ही देश के उन 18 शहरों की सूची में शामिल हो गया जहां आधुनिक शहरी जल परिवहन प्रणाली विकसित की जा रही है.

पर्यटन विभाग के बयान के अनुसार समझौता पत्र पर आइडब्ल्यूएआइ के चेयरमैन सुनील कुमार सिंह और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर ने हस्ताक्षर किए. इस परियोजना के तहत अत्याधुनिक हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कैटामारन जलयान ‘एमवी निशादराज’ का संचालन होगा. यह बैटरी और ईंधन दोनों पर चलने में सक्षम होगा और इसमें लगभग 100 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगे. पूरा जलयान वातानुकूलित होगा, जिससे यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा. बिहार के पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह ने कहा कि यह परियोजना पटना के पर्यटन को नयी दिशा देगी और शहरी परिवहन व्यवस्था में मील का पत्थर साबित होगी. उन्होंने कहा कि जल मेट्रो के जरिये गंगा की खूबसूरती का आनंद लेने के साथ-साथ लोगों को सुरक्षित और आधुनिक परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा.

इन प्रमुख ठिकानों पर ठहराव होगा

पर्यटन सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि जल मेट्रो सेवा दीघा घाट से कंगन घाट तक चलायी जायेगी, जिसमें दीघा पर्यटन घाट, एनआईटी घाट और गायघाट जैसे प्रमुख ठिकानों पर ठहराव होगा. साथ ही, इस सेवा का परीक्षण जल्द ही पटना से शुरू किया जायेगा. भविष्य में 10 और ठिकानों को जल मेट्रो नेटवर्क से जोड़े जाने की योजना है.अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना से न केवल पटना में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि शहर के प्रदूषण और यात्रा समय में भी कमी आयेगी.

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