कर्पूरी, वेमुला और सहजानंद मेरे आदर्श अफजल गुरु नहीं : कन्हैया

पटना : जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि हमारे आदर्श कर्पूरी ठाकुर, सहजानंद सरस्वती और रोहित वेमुला हैं, न कि अफजल गुरु. देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी व जमानत पर रिहा होने के बाद पहली बार पटना आये कन्हैया कुमार ने शनिवार को कहा कि आतंकवाद की परिभाषा को लेकर आज […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 1, 2016 6:53 AM
पटना : जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि हमारे आदर्श कर्पूरी ठाकुर, सहजानंद सरस्वती और रोहित वेमुला हैं, न कि अफजल गुरु. देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी व जमानत पर रिहा होने के बाद पहली बार पटना आये कन्हैया कुमार ने शनिवार को कहा कि आतंकवाद की परिभाषा को लेकर आज भी मैं सवाल खड़े करता हूं. क्या आम-आदमी की पीड़ा और समस्याओं की बात करने वाला आतंकवादी होता है?
चूंकि अफजल का मामला कोर्ट में चल रहा है, इसलिए मैं अधिक नहीं बोलूंगा, किंतु यह जरूर जानना चाहता हूं कि अफजल का कौन विरोधी और कौन समर्थक है, क्या इसे नागपुर तय करेगा? जनशक्ति भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कन्हैया ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर, स्वामी सहजानंद और रोहित वेमुला हमारे आदर्श हैं.
कन्हैया ने बिहार में शराबबंदी की तारीफ की. लेकिन, इस फैसले में आम लोगों की स्वतंत्रता की उपेक्षा की बात कहते हुए आपत्ति भी की. जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद का नाम लिये बिना बिहार में वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं होने की टिप्पणी भी की. दो दिवसीय पटना दौरे के क्रम में शनिवार को कन्हैया ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद समेत अन्य राजनेताओं से मुलाकात की.
रविवार को एसके मेमोरियल सभागार में छात्रों की सभा को संबोधित करेंगे. साथ ही दोपहर बाद जेएनयू पूर्ववर्ती छात्रों की ओर से आयोजित एक सभा में भाग लेंगे.
इसके पहले संवाददाता सम्मेलन में कन्हैया ने महिलाओं के मंदिर प्रवेश पर रोक, भारत माता की जय कहने तथा शराबबंदी विवाद, बिहार के विश्वविद्यालयों में छात्र संघ का चुनाव न होने, असहिष्णुता और रिसर्च स्कॉलरशिप का स्टाइपेन बंद किये जाने जैसे कई मुद्दों पर बात की. उन्होंने साफ किया कि हमारा कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है. बिहार हमारी धरती है. हम यहां विश्वविद्यालय के छात्रों के बेसिक एजेंडे पर छात्र व नेताओं से बात करने आये हैं.
उन्होंने कहा कि बिहार के अधिकतर नेता छात्र राजनीति से ही निकले हैं, इसके बावजूद यहां 28-30 वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए. हालांकि, इसके लिए वे अकेले नीतीश कुमार को दोषी मानने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा, नीतीश कुमार तो 11 वर्षों से ही सीएम हैं. उनके पहले के सीएम भी छात्र संघों का चुनाव क्यों नहीं करा पाये?
भाजपा के खिलाफ गंठबंधन बनता नहीं दिख रहा
कन्हैया ने माना कि देश में भाजपा के खिलाफ गंठबंधन बनता नहीं दिख रहा है. भाजपा का नाम लिये बिना कहा कि एक दल अजब तरह की राजनीति कर रहा है. वह भारत माता की जय बोलने के लिए लोगों को विवश कर रहा है, वहीं भारत माता के हाथों में तिरंगा के बजाय भगवा ध्वज दे रहा है. देश में असहिष्णुता बढ़ रही है. समाज पर खास तरह की विचारधारा थोपी जा रही है और स्वतंत्रता पर लगातार हमले हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिहार में छात्र राजनीति मृत प्राय हो गयी है. आज पॉलिटिशियनों की राजनीति एमपी-एमएलए से शुरू होती है और वहीं खत्म हो जाती है.
उन्होंने कहा कि एक दल राजनीति में सेंसेशन पैदा करने में माहिर है. सेंसेशन पैदा कर वह आम लोगों को मुख्य मुद्दों से भटकाने का काम कर रहा है. एक दल के नेता ने तो लोगों के बैंक खातों में 15-15 लाख रुपये डालने की बातें कहीं थीं, अब कह रहे हैं कि वह तो जुमलेबाजी थी. अगस्ता डील संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझसे यह गलत सवाल पूछा जा रहा है. मैं कांग्रेसी नहीं हूं, जो इस पर कोई जवाब दूंगा.