Patna News: गुलजारबाग स्थित बारगाह इमाम बांदी बेगम वक्फ स्टेट में बुधवार की शाम 72 ताबूत आयोजन समिति की ओर से 72 ताबूत जुलूस निकाला गया. हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 अंसारों की शहादत का जिक्र होते ही पूरा माहौल गमगीन हो गया और जायरीनों की आंखें नम हो गईं. कार्यक्रम स्थल पर "या हुसैन" की सदाएं लगातार गूंजती रहीं.
तलावत, मर्सिया और तकरीर से शुरू हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत सैयद एहफाम अब्बास रिजवी ने तलावत-ए-कलाम पाक से की. इसके बाद सैयद नासिर अब्बास साहिब पेशखानी और सैयद फर्रुख हुसैन नकवी ने मर्सिया पढ़ा. दिल्ली से आए मौलाना सैयद नजफ आबदी नजफी साहिब ने मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने इंसानियत और सत्य की रक्षा के लिए अपनी शहादत दी थी.
एक-एक शहीद की शहादत का हुआ जिक्र
लखनऊ से आए मौलाना रवीश शिराजी ने कर्बला के शहीदों की शहादत का दर्दनाक वर्णन किया. एक-एक कर शहीदों के ताबूत निकाले गए और उन्हें जायरीनों के बीच लाया गया. अली अकबर के ताबूत से लेकर छह माह के अली असगर के झूले तक का जिक्र होते ही महिलाओं और बच्चों सहित उपस्थित लोगों की आंखें भर आईं. कार्यक्रम में कर्बला के अंतिम शहीद हजरत इमाम हुसैन के ताबूत का भी प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया. अंत में मुसा अली हाशमी ने सलाम पेश किया.
बिहार में अनूठा आयोजन
72 ताबूत आयोजन समिति के संयोजक सैयद हादी हसन, मिर्जा इम्तेयाज हैदर, सैयद अमानत अब्बास और सैयद नासिर अब्बास ने बताया कि इस तरह का आयोजन बिहार में केवल पटना सिटी में ही होता है. उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 से इसकी शुरुआत की गई थी और इस वर्ष इसका 30वां आयोजन हुआ. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड समेत बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में जायरीन और मौलाना शामिल हुए.
देर रात तक चलता रहा ताबूतों का सिलसिला
बहत्तर ताबूतों का सिलसिला देर रात तक जारी रहा. आयोजन में दरगाह चमडोरिया बाबूल हवाइच के सचिव शाह जौर इमाम जौनी, सैयद हसन अली, तनवीरूल हसन तन्नू, सैयद जिया उर्फ पन्ना, सरबर इमाम, डॉ सिकंदर अली समेत सैकड़ों जायरीन मौजूद रहे.
