पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि तोड़े गये पुराने भवन से निकलने वाली सामग्री (ठोस कचरे) के प्रबंधन की जिम्मेदारी अब निर्माण एजेंसियों की होगी. 20 टन रोजाना अथवा माह में 300 टन से अधिक ठोस कचरा सामग्री निकलने पर निर्माण एजेंसी को उसका प्रबंधन करना होगा.
इस ठोस कचरे से प्रदूषण नहीं फैले इसके उपाय करने होंगे. निजी या सरकारी निर्माण एजेंसियां सभी इसके दायरे में होंगी. किसी को कोई छूट नहीं मिलेगी. नियम तोड़ने वाली निजी के साथ सरकारी एजेंसियों पर भी सख्त कार्रवाई की जायेगी.
पटना में चार नयी जगहों पर प्रदूषण मापक डिस्प्ले बोर्ड लगाये जाने के अलावा प्रदेश के अन्य नगरों मसलन हाजीपुर, भागलपुर, दरभंगा में नवंबर तक ये डिस्प्ले बोर्ड काम करने लगेंगे. उन्होंने कहा कि प्रदेेश के सभी जिलाें और संभागीय मुख्यालयों सहित कुल 42 शहरों में प्रदूषण मापक डिस्प्ले बोर्ड लगाये जायेंगे. ताकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाये जा सकें.
राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की तरफ से ”निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2016” के स्टेक होल्डर और शीर्ष अफसरों के साथ मंगलवार को आयोजित बैठक के दौरान उन्होंने यह कहकर सरकारी निर्माण एजेंसियों के अफसरों को सकते में डाल दिया कि आरओबी और दूसरे सरकारी निर्माण में भी प्रदूषण नियंत्रण के उपाय नहीं किये जा रहे हैं. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस कचरे से शहर में सर्वाधिक पीएम 2.5 पैदा हो रहा है. इससे घातक बीमारियां भी हो रही हैं.
