पटना : हिंदी के वरिष्ठ लेखक और कवि डॉ लषण शर्मा नही रहे. मंगलवार को सुबह में हृदय गति रुक जाने से उनकी मृत्यु हो गयी. खगड़िया के सनहौली मुहल्ले में स्थित अपने घर में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली, वे 70 वर्ष के थे.
उनके निधन के समाचार से साहित्य जगत में शोक की लहर है. मंगलवार की शाम बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में एक शोक गोष्ठी हुई, जिसकी अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डाॅ अनिल सुलभ ने कहा कि डाॅ शर्मा एक महान चिंतक और विचारक थे.
उनके साहित्य में अध्यात्म,दर्शन और समाज की पीड़ा की मार्मिक अभिव्यक्ति मिलती है. उनकी दो कृतियां, ‘रामास्था की असलियत’ तथा ‘गांधी-विमर्श’, साहित्य संसार में बहुत चर्चित हुई. वे एक प्रतिभा संपन्न कवि भी थे और उनकी सैकड़ों कविताएं प्रकाशन की प्रतीक्षा में है.
अपना शोक प्रकट करते हुए, गीति चेतना के वरिष्ठ कवि और समालोचक नचिकेता ने कहा कि डाॅ शर्मा के निधन की सूचना ने उन्हें अत्यंत मर्माहत किया है. उनके निधन से साहित्य-जगत और बौद्धिक-लेखन को अपूरणीय क्षति पहुंची है. उन्होंने सम्मेलन अध्यक्ष से डॉ शर्मा की अप्रकाशित कृतियों के प्रकाशन का भी आग्रह किया.
शोक-गोष्ठी में, वरिष्ठ शायर आरपी घायल, डॉ मेहता नगेंद्र सिंह, योगेन्द्र प्रसाद मिश्र, कृष्णरंजन सिंह, प्रो सुशील कुमार झा, वीणा यादव,निशिकांत मिश्र,कुमारी मेनका, नरेश कुमार आदि ने भी अपने उद्गार व्यक्त किये. शोक-गोष्ठी के अंत में दो मिनट का मौन रख कर दिवंगत आत्मा की सद्गति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गयी.
